बड़कोट, उत्तरकाशी। विकास के दावों के बीच यमुनाघाटी के दूरस्थ गांवों की हकीकत आज भी बेहद चिंताजनक है। ग्राम पंचायत खांसी के अंतर्गत स्थित दौणी गांव में सड़क सुविधा के अभाव के कारण ग्रामीणों को आज भी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बीमार अथवा असहाय लोगों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को उन्हें पीठ पर उठाकर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है।
रविवार को दौणी गांव की 75 वर्षीय श्रीमती सुरतमा देवी की अचानक तबीयत बिगड़ने पर ग्रामीणों ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए उन्हें पीठ पर उठाकर दुर्गम पैदल मार्ग से बाहर निकाला। इसके बाद उन्हें उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पुरोला पहुंचाया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक गांव तक मोटर मार्ग नहीं पहुंच सका है। सड़क न होने के कारण बीमार, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को रोजमर्रा की जिंदगी में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। आपातकालीन स्थिति में समय पर चिकित्सा सुविधा न मिल पाने से जान का भी खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि दौणी गांव तक शीघ्र मोटर मार्ग का निर्माण कराया जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिल सके और भविष्य में किसी भी मरीज को पीठ पर ढोकर अस्पताल ले जाने की विवशता समाप्त हो।
इस दौरान रविंद्र बर्त्वाल, शीशपाल, कृष्ण, जगबीर, यशवंत, कपिल, प्रवीण असवाल, आशीष, दिनेश, पीयूष, विमला देवी, राधा देवी, नीलम देवी सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे और मरीज को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाने में सहयोग किया।

