बड़कोट। उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के वितरण खंड बड़कोट में विद्युत लाइन शिफ्टिंग को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। सारिगाड़ पेट्रोल पंप के निकट 11 केवी विद्युत लाइन और ट्रांसफार्मर को कथित रूप से फरवरी व मार्च माह में बिना विधिवत आगणन और विभागीय स्वीकृति के स्थानांतरित किए जाने के आरोप लगे हैं। मामला सामने आने के बाद विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और स्थानीय लोगों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग उठाई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सारिगाड़ क्षेत्र में सड़क से काफी नीचे स्थित 11 केवी लाइन और ट्रांसफार्मर को फरवरी अंतिम सप्ताह और मार्च प्रथम सप्ताह के मध्य हटाकर राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप स्थानांतरित कर दिया गया। आरोप है कि इस कार्य के लिए निर्धारित विभागीय प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। आमतौर पर किसी भी विद्युत पोल या लाइन को हटाने अथवा शिफ्ट कराने के लिए उपभोक्ताओं को आवेदन करने, आगणन स्वीकृत कराने और निर्धारित धनराशि जमा करने जैसी औपचारिकताओं से गुजरना पड़ता है। ऐसे में पूरे फीडर की लाइन और ट्रांसफार्मर का स्थानांतरण बिना स्वीकृति किए जाने के आरोप चर्चा का विषय बन गए हैं।
सूत्रों के अनुसार यह कार्य अधिशासी अभियंता के मौखिक निर्देशों पर कराया गया था। सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी में यह भी सामने आया है कि मामले की जानकारी मिलने पर सहायक अभियंता द्वारा संबंधित अवर अभियंता से स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसके बाद अवर अभियंता ने एनएच बड़कोट और डामटा चौकी को भी पत्राचार किया।
स्थानीय ग्रामीणों और काश्तकारों रोशन, विवेक सिंह, अनोज सिंह, मुकेश तथा ललित ने आरोप लगाया कि विभाग अक्सर किसानों की सहमति के बिना खेतों और निजी भूमि के आसपास बिजली के पोल स्थापित कर देता है। जब लोग इन्हें हटाने की मांग करते हैं तो उनसे भारी धनराशि जमा कराने के बाद ही कार्रवाई की जाती है। ऐसे में बिना निर्धारित प्रक्रिया के एक पूरे 11 केवी फीडर और ट्रांसफार्मर का स्थानांतरण किए जाने से विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षित स्थान पर स्थापित लाइन और ट्रांसफार्मर को हटाकर दूसरे स्थान पर पहुंचाना किसी एक कर्मचारी के स्तर का कार्य नहीं है। उनका आरोप है कि यह कार्य विभागीय अधिकारियों की जानकारी के बिना संभव नहीं हो सकता। उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
इस संबंध में उप वितरण खंड में तैनात सहायक अभियंता अजय सेमवाल ने बताया कि जैसे ही उन्हें लाइन शिफ्टिंग की जानकारी मिली थी उन्होंने संबंधित अवर अभियंता को स्पष्टीकरण के लिए पत्र जारी किया। उन्होंने माना कि बिना निर्धारित प्रक्रिया के कार्य किया गया है तो यह नियमों के विपरीत है। उन्होंने यह भी बताया कि मामले से अधिशासी अभियंता को अवगत करा दिया गया था।
वहीं अधीक्षण अभियंता युद्धवीर सिंह तोमर ने कहा कि मामला संज्ञान में आते ही अधिशासी अभियंता परीक्षण खण्ड की अध्यक्षता में जांच कमेटी बनाई गई थी जिसकी जांच रिपोर्ट आई नही है। यदि जांच में बिना आगणन स्वीकृति के लाइन शिफ्ट की गई होगी, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोग अब जांच और कार्रवाई की दिशा में विभाग के अगले कदम पर नजर बनाए हुए हैं।

