बड़कोट, उत्तरकाशी। यमुनोत्री धाम क्षेत्र की गीट्ठपट्टी के 12 गांवों के आराध्य इष्ट देव समेश्वर महाराज की पावन अषाढ़ मेला एवं खरसाली की पारंपरिक मुल्क्या जातर श्रद्धा, आस्था और लोक संस्कृति के रंगों के बीच हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुई। मेले में क्षेत्रवासियों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर देव आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर भटवाड़ी क्षेत्र के जखोल और भंगैली से आई अतिथि देव डोलियों का पारंपरिक विधि-विधान से स्वागत एवं पूजा-अर्चना की गई। देव मिलन के इस अद्भुत अवसर ने मेले की भव्यता और धार्मिक महत्व को और अधिक बढ़ा दिया। ढोल-दमाऊं की पारंपरिक धुनों, रणसिंघा और लोक वाद्यों की गूंज के बीच पूरा खरसाली गांव भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा।
कार्यक्रम के दौरान समेश्वर महाराज के डांगरी आसन तथा पारंपरिक रासो-तांदी का आयोजन किया गया, जिसमें गीट्ठपट्टी क्षेत्र के सभी गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। पारंपरिक लोकनृत्य, देव परंपराओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और देव आस्था की अनुपम झलक प्रस्तुत की।
इस शुभ अवसर पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजलवान, पूर्व विधायक केदार सिंह रावत, यमुनोत्री विधायक संजय डोभाल, भाजपा मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान, खरसाली प्रधान प्रतिनिधि विपिन उनियाल, यमुनाघाटी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सोवन सिंह राणा, भाजपा नेता संदीप राणा, जयराज बिष्ट, महाबीर पंवार (माही) सहित समस्त देवता समिति के सदस्य, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड की देव परंपराएं केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं हैं, बल्कि यह प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का आधार भी हैं। उन्होंने इस प्रकार के मेलों और जातरों को भावी पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए सभी से लोक संस्कृति के संरक्षण का आह्वान किया।

