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उत्तरकाशी बड़ी खबर राज्य उत्तराखंड

गड़बड़झाला।बजलाड़ी में करोड़ों के खेल की आशंका! फीडर मौजूद होने के बावजूद बिछाई नई लाइन, यूपीसीएल पर सरकारी धन की बर्बादी का आरोप… पढ़ें खबर।

 

बड़कोट। उत्तरकाशी जनपद के बड़कोट क्षेत्र में यूपीसीएल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि बजलाड़ी क्षेत्र में पहले से विद्युत फीडर उपलब्ध होने के बावजूद महज चार सोलर प्लांटों को लाभ पहुंचाने के लिए कुआं बिजलीघर से नई बिजली लाइन बिछा दी गई, जिससे निगम को लाखों रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ा।

सामाजिक संगठन जय हो ग्रुप ने इस पूरे मामले को सरकारी धन की खुली बर्बादी बताते हुए मुख्यमंत्री और ऊर्जा सचिव से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। संगठन का दावा है कि जिन सोलर प्लांटों के लिए नई लाइन बिछाई गई, उनकी दूरी मौजूदा बजलाड़ी फीडर से करीब 500 मीटर ही है। इसके बावजूद 5 से 7 किलोमीटर लंबी अलग लाइन खड़ी कर दी गई।

संगठन का आरोप है कि जब पहले से उपलब्ध फीडर के माध्यम से बिजली आपूर्ति संभव थी तो नई लाइन बिछाने की जरूरत क्या थी? इस निर्णय से न केवल निगम के संसाधनों का अनावश्यक उपयोग हुआ बल्कि सरकारी खजाने को भी लाखों रुपये की चपत लगी।

जय हो ग्रुप ने दावा किया कि ऐसा ही मामला मोरी ब्लॉक में भी सामने आया है, जहां पहले से फीडर मौजूद होने के बावजूद सोलर फीडर के नाम पर अलग लाइन बिछाई गई। संगठन का कहना है कि यदि इन परियोजनाओं की तकनीकी और वित्तीय जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।

संगठन ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारियों और निजी हितों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को दरकिनार कर फैसले लिए गए हैं। उन्होंने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

वहीं, विवाद बढ़ने के बाद यूपीसीएल बड़कोट के अधिशासी अभियंता धर्मवीर सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि मौजूदा फीडर पर अतिरिक्त भार पड़ने और विद्युत आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए नई लाइन बिछाई गई है। उन्होंने बताया कि इसके लिए उच्च अधिकारियों से अनुमति प्राप्त की गई थी।

हालांकि सवाल यह बना हुआ है कि जब निकट दूरी पर पहले से फीडर उपलब्ध था तो नई लाइन पर लाखों रुपये खर्च करने की आवश्यकता आखिर क्यों पड़ी? अब निगाहें शासन स्तर पर संभावित जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।

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