यमुनोत्री।आज से बहुप्रतीक्षित चारधाम यात्रा का विधिवत शुभारंभ हो गया है। यात्रा की शुरुआत के साथ ही धार्मिक आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब खरशाली (खुशिमठ) स्थित शीतकालीन गद्दी स्थल से माँ यमुना की उत्सव डोली, समेश्वर देवता की अगुवाई में यमुनोत्री धाम के लिए रवाना हुई।
डोली प्रस्थान के दौरान खरशाली एवं आसपास के गांवों में भावुक माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों ने नम आंखों से अपनी आराध्य देवी माँ यमुना को विदा किया। पूरे क्षेत्र में ढोल-नगाड़ों, मंत्रोच्चार और जयकारों के बीच डोली यात्रा आगे बढ़ी, जिसने श्रद्धालुओं को भक्ति भाव से सराबोर कर दिया।
दरअसल, शीतकाल के दौरान माँ यमुना की भोग मूर्ति खरशाली गद्दी स्थल में विराजमान रहती है, जहां पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना और दर्शन होते हैं। लेकिन ग्रीष्मकाल के आगमन के साथ ही अब माँ यमुना की पूजा-अर्चना यमुनोत्री धाम में संपन्न होगी।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, माँ यमुना यमुनोत्री धाम में भैया दूज (यम द्वितीया) तक विराजमान रहती हैं। इस दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु धाम पहुंचकर दर्शन का लाभ उठाते हैं।
परंपरा के अनुसार, खरशाली और आसपास के ग्रामीण माँ यमुना की डोली के साथ पैदल यात्रा करते हुए यमुनोत्री धाम तक जाते हैं। यह यात्रा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं को भी जीवंत बनाए रखती है।
चारधाम यात्रा के शुभारंभ के साथ ही प्रशासन और मंदिर समिति ने यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और तय सुव्यवस्थित दर्शन के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। आने वाले दिनों में यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है।

