सरकारी सेवा में रहने के बाबजूद समाज सेवा का उदाहरण है, जयदेव सिंह चौहान……
बड़कोट उत्तरकाशी ।
समाज में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो बिना किसी दिखावे के निस्वार्थ भाव से सेवा कार्यों में लगे रहते हैं। ऐसे ही व्यक्तित्व हैं उत्तराखंड वन निगम, बड़कोट में तैनात जयदेव सिंह चौहान, जिनका सेवा भाव नौकरी में आने से पहले से ही कूट-कूट कर भरा हुआ है। वे भले ही किसी मंच पर दिखाई न दें, लेकिन जरूरतमंदों के लिए हमेशा आगे खड़े नजर आते हैं।
नगर क्षेत्र में होने वाले छोटे-बड़े सामाजिक कार्य हों या यात्राकाल के दौरान किसी लावारिस व्यक्ति का निधन—श्री चौहान हर स्थिति में मानवता का धर्म निभाते आए हैं। कई बार गरीब और असहाय व्यक्तियों के दाह संस्कार के लिए लकड़ी का वे अपनी जेब से खर्च उठाकर पर्ची कटवाते हैं और पूरे विधि-विधान से अंतिम संस्कार करवाने में सहयोग करते हैं।
वैसे जब भी किसी लावारिस शव या जरूरतमंद व्यक्ति के संबंध में पुलिस थाना अथवा किसी सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा उन्हें फोन किया जाता है, तो जयदेव सिंह चौहान बिना किसी हिचक के मदद के लिए आगे आ जाते हैं। उनका मानना है कि सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और जरूरत के समय किसी का साथ देना ही सच्ची मानवता है।
पर्दे के पीछे रहकर लगातार समाज सेवा कर रहे जयदेव सिंह चौहान जैसे लोग वास्तव में समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उनके कार्यों से यह संदेश मिलता है कि सच्ची सेवा वही है, जो बिना प्रचार और अपेक्षा के की जाए।
हमनें इसी भावना के साथ जयदेव सिंह चौहान के सेवाभाव को शब्दों में पिरोने का प्रयास किया है। यदि किसी को यह सेवाभाव पसंद न आए, तो कृपया इसे अन्यथा न ले।
टीम यमुनोत्री Express

