बड़कोट।रवांई शरदोत्सव, जिसका इतिहास, पौराणिक आस्था और सांस्कृतिक गौरव आज भी सैकड़ों लोगों के दिलों में जीवंत है, इस शरदोत्सव पहले दिन राजनीतिक खींचातानी की वजह से चर्चा में रहा। अपनी समृद्ध परंपराओं के लिए प्रसिद्ध यह सांस्कृतिक एवं विकास मेला इस बार विवादों में घेरने के प्रयासों से दिखाई दिया, जिससे स्थानीय जनता में निराशा देखी गई।
मेले के उद्घाटन का कार्यक्रम देवडोली के सानिध्य में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री द्वारा किए जाने की चर्चा जोरों पर थी। लोग उत्साह और अपेक्षा के साथ सीएम के आगमन की प्रतीक्षा कर रहे थे। लेकिन अंतिम समय में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम निरस्त हो जाने के कारण क्षेत्रवासियों को मायूस लौटना पड़ा। लोगों ने बताया कि वे मुख्यमंत्री का स्वागत करने और इस ऐतिहासिक मेले के शुभारंभ को देखने के लिए लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे थे।
इस बीच, क्षेत्र में यह चर्चा भी जोर पकड़ती रही कि कुछ भाजपा नेताओं द्वारा सीएम का कार्यक्रम न लगाने की जिद ने स्थिति को और अधिक जटिल कर दिया। इतना ही नहीं, रवांई शरदोत्सव को हैलीपेड मैदान में आयोजित किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई, जिससे आयोजक मंडल एवं नगरवासियों में रोष व्याप्त हो गया। लोगों का कहना था कि यह मेला पूरे क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर है और इसमें राजनीति का प्रवेश करना उचित नहीं।
आयोजक मंडल से जुड़े लोगों के अनुसार, मेले का उद्देश्य क्षेत्र की संस्कृति, पर्यटन और विकास को बढ़ावा देना है। ऐसे में राजनीतिक मतभेदों के चलते कार्यक्रम में व्यवधान पैदा होना बेहद निराशाजनक है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि राजनीतिक खींचातानी कहीं न कहीं क्षेत्र के विकास कार्यों पर विराम लगाने का काम कर रही है।
रवांई शरदोत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, पारंपरिक रीतियां और धार्मिक गतिविधियां आयोजित की जाती है , जिनका शुभारंभ मुख्यमंत्री के हाथों होने वाला था। परंतु कार्यक्रम के टलने से मेले का भव्य आरंभ फीका पड़ गया और लोगों में निराशा का माहौल बना रहा।
स्थानीय जनता एवं आयोजकों ने यह उम्मीद जताई है कि भविष्य में ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों को राजनीति से दूर रखकर क्षेत्र के विकास और परंपराओं के सम्मान को प्राथमिकता दी जाएगी।

