बड़कोट। ‘हिम्मत बुलंद है अपनी,पत्थर-सी जान रखते हैं, कदमों तले जमीं तो क्या, हम आसमान रखते हैं’, यह पंक्तियां बिहार के 36 वर्षीय राहुल कुमार पर सटीक बैठती हैं। इसे राहुल की हिम्मत और आस्था ही कहेंगे कि दो पैरों से लाचार होने के बावजूद वह चारधाम दर्शन को यहां पहुंचे हैं। उन्होंने केदारनाथ और यमुनोत्री की यात्रा अपने बूते पर आसानी से की । बिहार के जिला ललन्दा के ग्राम प्रेमनविद्या नगर नौसा निवासी राहुल कुमार बचपन से ही पोलियोग्रस्त हैं। उनके दोनों पैर घुटने से नीचे काम नहीं करते। सो, वह घुटनों और हाथों के बल पर ही चल-फिर पाते हैं, मगर राहुल ने इस दिव्यांगता को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। ईश्वर पर अटूट आस्था रखने वाले राहुल अब तक देश के प्रख्यात मंदिरों के दर्शन कर चुके हैं। मगर, अब वह सबसे कठिन हिमालय के चारधामों की यात्रा पर आए हैं। राहुल कहते हैं कि उत्तराखंड के चारों धाम गंगोत्री, यमुनोत्री, बदरीनाथ व केदारनाथ की यात्रा उनके लिए थोड़ा कठिन जरूर है। मगर, मजबूत इरादों के आगे कठिनाइयां भी दम तोड़ देती हैं। कहते हैं, मैंने केदारनाथ और यमुनोत्री की चढ़ाई बिना किसी मदद के स्वयं चढ़ी है। राहुल ने बताया कि दिव्यांगजनों के प्रति समाज की मानसिकता काफी बदल चुकी है। समाज का हर वर्ग उनके सहयोग को आगे आ रहा है। कहा कि दिव्यांगों को सार्वजनिक स्थलों पर पहुंचने में अभी भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि राज्य सरकार ऐसे स्थानों पर सीढ़ियों के साथ दिव्यांगों के लिए रैंप का निर्माण कराये। ताकि वह बिना मदद के ऐसे दुर्गम स्थलों पर पहुंच सकें।

