बड़कोट, उत्तरकाशी।
उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) में स्थानांतरण आदेशों के अनुपालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। बड़कोट विद्युत वितरण खंड के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) धर्मवीर सिंह का यूपीसीएल मुख्यालय द्वारा नारायणबगड़ स्थानांतरण किए जाने के लगभग एक सप्ताह बाद भी उन्होंने अपना कार्यभार नहीं छोड़ा है। इससे विभागीय कर्मचारियों और स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, नई तैनाती पर कार्यभार ग्रहण करने के बजाय अधिकारी अपने स्थानांतरण को रुकवाने के प्रयासों में जुटे हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अब तक कार्यभार हस्तांतरण नहीं होने से कई सवाल उठ रहे हैं।
यूपीसीएल मुख्यालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद अधिकारी का पुराने पद पर बने रहना विभागीय अनुशासन और प्रशासनिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। सामाजिक संगठन “जय हो “ग्रुप का कहना है कि यदि स्थानांतरण आदेशों का समय पर पालन नहीं कराया जाता, तो इससे शासन और निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली तथा विश्वसनीयता पर भी असर पड़ सकता है। साथ ही स्थानीय लोग आंदोलन को विवश हो जाएंगे। आपको बताते चले कि ईई धर्मवीर सिंह पहले भी विभिन्न मामलों को लेकर विवादों में रहे हैं। उन पर ट्रांसफर-पोस्टिंग में मनमानी, लाइन शिफ्टिंग में कथित अनियमितताओं तथा सब्सिडी के लिए अपनी पत्नी के नाम पर सोलर प्लांट स्थापित कराने जैसे आरोप लग चुके हैं। इन मामलों को लेकर समय-समय पर शिकायतें भी सामने आती रही हैं। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित अधिकारी का पक्ष सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। ऐसे में स्थानांतरण के बाद भी उनके पद पर बने रहने से विभाग और क्षेत्र में चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यदि किसी अधिकारी को स्थानांतरण आदेश पर आपत्ति हो तो उसके लिए निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया उपलब्ध है। लेकिन जब तक सक्षम प्राधिकारी आदेश में संशोधन, स्थगन अथवा निरस्तीकरण नहीं करता, तब तक आदेश का पालन करना संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी होती है। आदेश प्रभावी रहने के बावजूद पुराने पद पर कार्य करते रहना सेवा अनुशासन के अनुरूप नहीं माना जाता।
अब सभी की निगाहें यूपीसीएल प्रबंधन पर टिकी हैं। देखना होगा कि निगम अपने ही जारी स्थानांतरण आदेश का पालन कितनी सख्ती से सुनिश्चित करता है। यदि समय रहते स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तो विभागीय व्यवस्था और स्थानांतरण प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।
इस पूरे मामले पर अधीक्षण अभियंता युद्धवीर सिंह तोमर ने कहा कि स्थानांतरण आदेश का अनुपालन किया जाना चाहिए था। उन्होंने बताया कि मामले से उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा ताकि आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
टीम यमुनोत्री Express ब्यूरो

