उत्तरकाशी। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन ग्राम हर्षिल में चल रहे बाढ़ सुरक्षा कार्यों की धीमी प्रगति और गुणवत्ता को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष प्रदीप रावत ने हर्षिल पहुंचकर सुरक्षा कार्यों का स्थलीय निरीक्षण किया और कहा कि धराली–हर्षिल आपदा के 11 माह बाद भी सुरक्षा कार्यों की स्थिति बेहद निराशाजनक है, जो प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने बताया कि मौके पर केवल चार से पांच मजदूर गैबियन (तार के जाल) भरते हुए दिखाई दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जालों में छोटे पत्थरों के साथ सीमेंट के खाली कट्टों में मिट्टी भरकर उन्हें भी भराव सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यदि यह सही है तो यह निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रदीप रावत ने कहा कि स्थल पर मौजूद दो मशीनें भी केवल औपचारिकता निभाती हुई नजर आईं। बरसात अपने चरम पर होने के बावजूद सुरक्षा कार्यों की गति बेहद धीमी है, जिससे भविष्य में बड़ा खतरा उत्पन्न हो सकता है। उनका कहना था कि हर्षिल जैसे संवेदनशील क्षेत्र में युद्धस्तर पर कार्य किए जाने चाहिए थे, लेकिन वास्तविक स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है।
उन्होंने याद दिलाया कि धराली–हर्षिल आपदा के बाद पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन से मुलाकात कर तत्काल प्रभावी सुरक्षा कार्य शुरू कराने की मांग की थी। बावजूद इसके, 11 महीने बाद भी अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी है।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते गुणवत्तापूर्ण और तेज गति से सुरक्षा कार्य पूरे नहीं किए गए और भविष्य में हर्षिल क्षेत्र में किसी प्रकार की जन-धन की हानि होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग, जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और राज्य सरकार की होगी।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी हर्षिल की जनता की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं करेगी। यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो जनता के सहयोग से व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
निरीक्षण के दौरान पूर्व प्रमुख कनकपाल सिंह परमार सहित कांग्रेस के अन्य कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

