
जयप्रकाश बहुगुणा
बड़कोट/उत्तरकाशी
ग्लोबल वार्मिंग से लेकर प्रदूषण तक सभी कारक ग्लेशियर और गंगा के लिए नुकसानदेह रहे हैं. वही गंगा और ग्लेशियर को बचाने के लिए 23 साल पहले उत्तराखंड की बेटी शांति ठाकुर ने मुहिम शुरू की थी जो आज भी जारी है!आज तहसील सभागार में ग्लेशियर सरंक्षण दिवस पर ग्लेशियर व गंगा व यमुना के सरक्षंण को लेकर गोष्टी आयोजित की गई। जिसमें राजस्व विभाग ,वन विभाग ,आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, समाजसेवियों के बीच चर्चा की गई। ग्लेशियर लेडी श्रीमती शांति ठाकुर ने कहा कि
विकास के लिए लगातार प्रकृति के साथ छेड़छाड़ करना मानव सभ्यता को भारी पड़ता दिख रहा है।प्रकृति को इंसान ने अपने लालच के लिए इस कदर जख्मी कर दिया है कि उसका भयानक और विकराल रूप केदारनाथ आपदा और रैणी आपदा के रूप में हम देख चुके हैं.
ग्लेशियर हमारी नदियों में पानी के स्रोत हैं तो वहीं नदियां हमारी आर्थिक रीढ़ और जीवन की आधार हैं. . बीते 23 वर्षों से गंगा- यमुना और हिमालय के अस्तित्व को बचाने के लिए प्रयास कर रही है लोगों में जागरूकता लाने की कोशिशों में लगी हुई है.।इससे पूर्व दीपप्रज्वलन के बाद ग्लोबल वार्मिंग व पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा हुई। इस मौके पर न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती मीनाक्षी, तहसील दार धनी राम डंगवाल, रेंज अधिकारी शेखर सिंह राणा,वन दरोगा सरदार सिंह रावत,समाजसेवी अब्बल चन्द कुमाई,राजस्व विभाग अमीन भगवान सिंह ,उपेन्द्र सिंह , सुनील थपलियाल ,कल्पना ठाकुर,चंद्रवीर सिंह,उर्मिला रावत,कुसुम,रसना,कृष्णा राणा,सविता,नीलम डोभाल,सुमनलता,सुनीता,
दर्शनी राणा,रीता असवाल,सरिता आदि मौजूद थे

