सुरेश चंद रमोला
ब्रह्मखाल/उत्तरकाशी–
जिंदगी में सफलता पाने के लिए तरीका भले कोई भी हो मगर उस कार्य के प्रति लगन ,मेहनत और आत्मविश्वास से ही सफलता मिलती है। पहाड़ों के खाली होते गांवो की बंजर जमीनों की तस्वीर ने जब हिमरौल गांव के भरत सिंह राणा का मन दुखाया तो उन्होंने मन की टीस को कामयाबी मे बदल दिया।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “लोकल फार वोकल “थीम को सफल बनाते हुये वे आज बागवानी कृषि के क्षेत्र में मिशाल बन गये है। वे राज्य के अभी तक के सभी मुख्यमंत्रियों तथा प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा भी सम्मान प्राप्त कर चुके हैं। प्रगतिशील किसान श्री राणा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में अब तक सैकड़ों युवाओं और युवतियों को स्वरोजगार से जोड़ चुके हैं। लोकल फार वोकल थीम पर वे सेब,पुलम,आड़ू, खुमानी,माल्टा चुलू, नाशपाती और बुरांस आदि से जूस , चटनी वह अचार तथा पहाड़ी क्षेत्र के लोकल उत्पाद दालें ,सब्जियां, मंडुवा , झंगोरा, लाल चांवल , चुल्लू का तेल , शहद और चौलाई आदि से महिलाओं और बेरोजगारों के द्वारा तैयार उत्पाद को खरीद कर ग्रेडिंग के बाद पैंकिग कर उनका मार्केटिंग करते आ रहे है। बताते हैं कि वर्तमान में उत्तराखंड के अलावा हरियाणा, गुजरात ,मुंबई तामिलनाडु, कर्नाटका आदि प्रदेशों में भी इन उत्पादों को पार्सल के माध्यम से विक्रय किया जा रहा है। कोरोना काल में इन उत्पादों की भारी डिमांड पूरी की गई।
वे बताते हैं कि ” आल्ट्रा हाई-डेसिंट रूट स्टाक” सेब का बाग भी एक माडल भी हिमरौल में है जिसे कम भूमि पर अधिक मात्रा में उगाया जाता है।रुट स्टाक का यह सेब बागवानों की किस्मत बदल सकता है। इस सेब की मार्केट वैल्यू भी बहुत ज्यादा है। अनेक रोगो से मुक्ति दिलाने वाली तुलसी लेमन हर्बल चाय का उत्पादन भी वे गांव में कर रहे हैं। इसके अलावा भरत राणा ने मशरूम की खेती के प्लांट भी लगाये हुये है जिससे अच्छी आमद उन्हें प्राप्त हो रही। फल एवं सब्जी प्रसंस्करण के लिए उन्होंने फूड एंड वैजिटेविल प्रोसेसिंग यूनिट भी लगाई है जिसके माध्यम से वे उत्पादों का बाजारिकरण करते। उनके इस उद्योग में अब उनका बालक जगमोहन भी काम संभालने लगा है। यदि इंसान के मन में कुछ करने की क्षमता जाग उठे तो वह एक न एक दिन भरत राणा की तरह सफ़लता जरुर प्राप्त कर सकता है।
टीम यमुनोत्री Express

