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उत्तरकाशी बड़ी खबर राज्य उत्तराखंड

गड़बड़झाला।रिजॉर्ट मालिक ने काट डाले हरे पेड़, यमुना नदी तक बेरोकटोक बना डाली सड़क अफसर साधे हैं मौन, स्थानीय नागरिक दफ्तरों के काट रहे चक्कर.. पढ़ें।

 

 

बड़कोट/सुनील थपलियाल।उत्तरकाशी जिले के बड़कोट – यमुनोत्री क्षेत्र में सरकार के साथ आँख मिचौली का खेल खेला जा रहा है।
सरकार से सब्सिडी के नाम पर बाहरी व्यक्ति द्वारा स्थानीय प्रशासन व वन विभाग की आड़ में भूधसाव क्षेत्र पर सरकारी जमीन पर कब्जा और अवैध पातन सहित यमुना नदी तक अवैध रोड़ का निर्माण किया जाना सबसे बड़ा साक्ष्य है।
मालूम हो कि उत्तराखंड में बाहरी लोगों द्वारा ग्रामीणों की जमीन खरीद फरोख्त के मामले बढ़ते जा रहे हैं। यह हाल तब है जब सरकार सशक्त भू कानून लागू करने की बात कह कर अपनी पीठ ठोक रही है।
उत्तरकाशी के यमुनोत्री मार्ग पर ओजरी गाँव के अंतर्गत सिलाई बैंड पर रिजॉर्ट के नाम पर भारी भरकम जमीन की खरीद की गई है। खेल यह है कि इसमें ग्रामीणों के हिस्से की जमीन सहित सरकारी जमीन पर बेरोकटोक अवैध कब्जे किये जा रहे हैं। बाहरी व्यक्ति द्वारा लगभग तीन दर्जन नाली से अधिक उत्तराखंड लैंड पर समतलीकरण कर कब्जा कर दिया गया और दर्जनों हरे पेड़ काट डाले गए। यही नहीं यमुना नदी तक अवैध रूप से सड़क का निर्माण तक कर दिया गया। जाहिर है इसमें स्थानीय प्रशासन और अपर यमुना वन प्रभाग की संलिप्तता की आशंका व्यक्त की जा रही है क्योंकि प्रशासनिक संरक्षण और वन विभाग की मर्जी के बगैर यह स्थानीय लोगों के लिए तो संभव नहीं है। बाहरी लोगों पर क्यों इतनी दरियादिली दिखाई जाती है, यह यक्ष प्रश्न है।
इतना ही नहीं राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से अनापत्ति प्रमाण पत्र हासिल कर सौ नाली से अधिक भूमि को उपजिलाधिकारी कार्यालय से 143 धारा के तहत कृषि भूमि को गैर कृषि भूमि की अनुमति तक ले ली गयी जबकि यमुनोत्री मार्ग पर कई ग्रामीण अपने व्यवसाय के लिए 143 धारा की फाइल को क्लियरेंस के लिए महीनों से एसडीएम कार्यालय में चक्कर लगा रहे हैं।
मामला यहीं तक सीमित होता तो गनीमत थी। यहां कई अन्य मामले भी हैं जो अगले अंक में हम खुलासा करेंगे।
फिलहाल ओजरी गाँव के ग्रामीणों का कहना है कि पहले पूर्व विधायक द्वारा हमारी जमीन को औने पौने दाम पर ग्रामीणों को बिना विश्वास में लिए खरीद कर बाहरी व्यक्ति को रिजॉर्ट बनाने को दी गयी जबकि ग्रामीण आज अपने हक हकूक के लिए तरस रहे हैं। सार्वजनिक रास्ते,गौ चरान चुगान बंद कर दिए गये, अगर कोई ग्रामीण अपने हक हकूक की बात करते हैं तो उन्हें पुलिस का भय दिखाकर डराया जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक सब्सिडी के नाम पर चल रहे खेल को रोका जाए और नियमों का सरेआम उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सरकार वैधानिक कार्यवाही करे अन्यथा ग्रामीणों को आंदोलन के लिए बाध्य होना होगा। रिजॉर्ट मालिक राजेन्द्र अग्रवाल का कहना है कि सिलाई बैंड में पूर्व विधायक जी ने जो जमीन रजिस्ट्री कर हमें दी गयी उसी पर निर्माण कार्य किया जा रहा है। आरोप निराधार है।
इस मामले में उपजिलाधिकारी बृजेश कुमार तिवारी का कहना है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा सहित सभी प्रकरणों की गम्भीरता से जांच की जायेगी, जांच रिपोर्ट आने के बाद वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
दूसरी ओर प्रभागीय वनाधिकारी रविन्द्र पुंडीर ने कहा कि मेरे संज्ञान में उक्त मामला नहीं है अगर अवैध पेड़ों का अवैध कटान हुआ है अथवा वन भूमि पर बिना एनओसी सड़क का निर्माण हुआ होगा तो दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी।
गौरतलब है कि यहां कार्रवाई की बात तो हर अफसर की जुबान पर है लेकिन कार्रवाई होती कभी दिखती नहीं है। निवेश के नाम पर उत्तराखंड के संसाधनों की बंदरबांट का खुला खेल कब तक चलेगा, कोई नहीं कह सकता लेकिन बाहरी लोगों को मालामाल करने और स्थानीय लोगों की उपेक्षा की इन घटनाओं ने लोगों का भरोसा तो खत्म कर दिया है।

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