नई टिहरी ब्यूरो।
जनपद टिहरी गढ़वाल की गजा तहसील स्थित ग्राम गुमालगांव में 13 दिसंबर 2014 को हुए बहुचर्चित तिहरे हत्याकांड में अदालत ने एक बार फिर कड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश, टिहरी गढ़वाल नसीम अहमद की अदालत ने आरोपी संजय सिंह को मृत्युदंड की सजा सुनाते हुए 10 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है।
हाईकोर्ट के आदेश पर हुई पुनः सुनवाई
इससे पूर्व 24 अगस्त 2021 को इसी अदालत ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाई थी। मृत्युदंड की पुष्टि के लिए मामला नैनीताल हाईकोर्ट भेजा गया था। 10 मई 2022 को हाईकोर्ट ने निचली अदालत के निर्णय को निरस्त करते हुए प्रकरण को पुनः विचारण के लिए वापस भेज दिया था।
हाईकोर्ट के निर्देश पर आरोपी का विस्तृत मानसिक परीक्षण कराया गया। चिकित्सकीय रिपोर्ट में उसे मुकदमे की कार्यवाही का सामना करने के लिए पूर्णतः सक्षम पाया गया। इसके बाद ट्रायल दोबारा शुरू हुआ और अभियोजन पक्ष ने ठोस साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए।
2014 की खौफनाक वारदात
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) बेणीमाधव शाह व स्वराज्य पंवार के अनुसार, 13 दिसंबर 2014 को आरोपी संजय सिंह ने पहले जंगल में जाकर अपनी गर्भवती भाभी कांता देवी की निर्मम हत्या की। इसके बाद वह गांव लौटा और अपनी मां मीना देवी तथा सगे भाई सुरेंद्र सिंह को धारदार हथियार से बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया।
घटना के समय उसके पिता राम सिंह पंवार बाजार गए हुए थे, जिससे उनकी जान बच गई। हालांकि, इस त्रासदी के गहरे सदमे को वे सहन नहीं कर सके और लगभग दो महीने बाद उनका भी निधन हो गया।
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी
तीन हत्याओं को अंजाम देने के बाद आरोपी अपने पिता की लाइसेंसी बंदूक और खून से सनी तलवार लेकर घर के एक कमरे में छिप गया और खुद को अंदर से बंद कर लिया। सूचना पर पहुंची पुलिस व प्रशासनिक टीम के सामने उसने आत्मसमर्पण से इनकार कर दिया।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े, जिसके बाद आरोपी को काबू में किया गया। जांच के उपरांत पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया।
ठोस साक्ष्यों के आधार पर फैसला
पुनः विचारण के दौरान आरोपी ने स्वयं को निर्दोष बताया, किंतु 4 मई 2023 को अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत सशक्त साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने उसे दोषी पाया। अभियोजन और बचाव पक्ष की लंबी बहस के बाद 20 फरवरी को निर्णय सुरक्षित रख लिया गया था।
मंगलवार को अदालत ने अंतिम फैसला सुनाते हुए आरोपी को फांसी की सजा और 10 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।
क्षेत्र में फिर चर्चा का माहौल
इस जघन्य तिहरे हत्याकांड ने वर्ष 2014 में पूरे क्षेत्र को दहला दिया था। अब पुनः सुनाए गए मृत्युदंड के फैसले के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है। अदालत के इस फैसले को क्षेत्र में न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

