उत्तरकाशी/अरविन्द थपलियाल।कांग्रेस ज़िलाध्यक्ष मनीष राणा का भाजपा सरकार के कार्यकाल पर सवाल उठाये हैं।
मनीष राणा ने बताया कि भाजपा सरकार के तीन साल नहीं 8साल के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि भ्रष्टाचार, बिगड़ती कानून व्यवस्था ,बेलगाम नौकरशाही ,प्रदेश मे बढ़ती नशे की प्रवृत्ति ,बेरोजगारी, महिलाओं और दलितों का उत्पीड़न है ।आज असहिष्णुता, असहनशीलता राज्य की पहचान बनती जा रही है.
8 सालों में राज्य ने पाया कुछ नही सिर्फ खोया है ,सरकार के कार्यकाल में विकास ठप है। बेरोजगारी बढ़ी है। किसान परेशान है और सरकार के कामकाज से जनता में काफी निराशा है।
भाजपा सरकार सेवा दिवस के नाम जनता के टैक्स की गाड़ी कमाई को लुटाने का काम कर रही है और अपनी झूठी उपलब्धियां गिनाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है, जबकि हकीकत यह है कि राज्य भ्रष्टाचार का मॉडल बन चुका है। भ्रष्टाचार से जनता त्रस्त है. सरकार ने भ्रष्टाचार के नए झंडे गाड़े हैं. खनन, आबकारी, के ठेकों में भ्रष्टाचार का इतना बड़ा मेकैनिज्म बना डाला है कि विभाग के अधिकारी अब यह तय करने लगे हैं कि कौन सा ठेका किसको दिया जाएगा. मंत्री उस पर अपनी निगाह रखते हैं. शराब और खनन माफिया को पुलिस का संरक्षण मिला हुआ है।
हरियाणा और चंडीगढ़ से शराब अवैध रूप से उत्तराखंड के दूरदराज के हिस्सों में पहुंच रही है।
आज प्रदेश में आम जनता बिना रिश्वत दिए कोई काम नहीं करा सकती। कमीशनखोरी इतनी बढ़ गई है कि अब भ्रष्टाचार गूगल पे और पेटीएम के जरिए हो रहा है। बड़ी कंपनियों ने छोटे व्यवसायों के अवसर खत्म कर दिए हैं, और निर्माण कार्य मानकों के खिलाफ हो रहे हैं। सड़कों की हालत इतनी खराब है कि डामरीकरण दो महीने भी नहीं टिक पा रहा। बरसात में बिना गुणवत्ता वाले पुस्ते भरभराकर गिर जाते हैं, जिससे जनता की मेहनत की कमाई बर्बाद हो रही है।
मुख्यमंत्री शिकायत प्रकोष्ठ 1905 निष्क्रिय पड़ा है, जहां जनता की शिकायतों का न तो समाधान हो रहा है और न ही सुनवाई। अधिकारी बिना जांच किए शिकायतें डिलीट कर रहे हैं, और सरकार उनकी पीठ थपथपा रही है।
बीजेपी सरकार किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने की बात कह रही थी, लेकिन किसानों की दोगुनी आए आज तक नहीं हो सकी है. प्रदेश के हालात यह है की शराब सस्ती हो गई है लेकिन डीजल, खाद और बिजली-पानी का बिल, सभी महंगी हो गया हैं. प्रदेश में किसान भी पूरी तरह से खुद असहाय महसूस कर रहा है.
सरकार जनहित की योजनाओं से जुड़े बजट को खर्च नहीं कर पा रही है. प्रदेश के अंदर युवा बेरोजगार लाठी खाने को मजबूर हैं.
सरकार रोजगार देने में नाकाम रही है। सरकारी नौकरियों की विज्ञप्तियों में लगातार धांधली हो रही है, जिससे राज्य के युवा हताश हैं। उत्तराखंड अब पेपर लीक मामलों में सबसे आगे है, फिर भी सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है।

