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लोनिवि से 2012 में रिटायर होने के बाद सपने में भी सड़क दुरुस्त रखने की ही फिक्र,हर रोज सड़क पर काम करते नजर आएंगे, पढ़े पूरी खबर…..

सुनील थपलियाल उत्तरकाशी
बड़कोट।
सरकारी नौकरी में आधे से अधिक कार्मिकों द्वारा दिनभर में कितना काम किया जाता है, यह किसी से छिपी बात नहीं है। ज्यादा दूर क्यों जाना, अभी हाल में राज्य सरकार ने गड्ढा मुक्त सड़क का प्रदेश में अभियान चलाया था, कितने गड्ढे भरे गए और अभियान की सफलता दर क्या रही, यह आप अपने आसपास खुद देख कर अंदाज लगा सकते हैं। अब तस्वीर का एक अनूठा पहलू देखिए –
सेवानिवृत्त होने के एक दशक बाद भी विभाग से मिली पूर्व की जिम्मेदारी को निभाने का जज्बा कोई सख्श बिना वेतन निभा रहा हो तो दातों तले अंगुली दबाने का मन होता है। दुर्भाग्य से ऐसे लोग बहुत कम हैं लेकिन वे निविड अंधकार में उजाले की रोशनी की किरण जरूर जगाते हैं। निसंदेह इस तरह का जज्बा हर किसी मे नहीं होता। हम बात कर रहे हैं सेवानिवृत्त जगत चंद की।
60 साल की उम्र तक सड़क पर बेलदार की जिम्मेदारी बखूबी निभाने के बाद सेवानिवृत्त हुए बड़कोट के पास ग्राम तुनालका के निवासी जगत चंद 2012 में सेवानिवृत्त हो गए थे लेकिन उसके बावजूद वह तुनालका से कृष्णा गाँव व ब्लॉक तक सड़क की देखभाल करते आ रहे हैं। कहीं सड़क पर पत्थर आ जाए या चट्टानी मलबा, उसे वह अपने संसाधनों से साफ कर देते हैं। इतना ही नहीं गौमाटी रैन बसेरा में वह झाड़ू मारते नजर आ जाएंगे।
आज जहाँ आम व्यक्ति रिटायर होने के बाद अपने बच्चों व नाते रिश्तेदारों में समय व्यतीत करने तक सीमित रह जाते हैं, वहीं जगत चंद डोटियाल अपने आप को अभी भी लोनिवि का कर्मी समझकर सड़क को साफ सुथरा व गड्ढा मुक्त सड़क को बनाने में जुटे रहते है। हमारे संवाददाता ने जब उन्हें यह सब करते देखा तो उनसे पूछ ही लिया कि आप रिटायर होने के बाद भी सड़क पर पत्थर व मलबा हटाने में लगे रहते हैं, इसकी वजह क्या है? अब आप उनका जबाब सुनें –
जगत चंद कहते हैं कि अभी मैं दिल से रिटायर नहीं हुआ हूं, लोनिवि ने उन्हें 60 साल होने पर सेवानिवृत्त कर दिया था लेकिन मुझे सपने में भी सड़क ही नजर आती है, उस पर काम करना आदत में शुमार हो चुका है और जब तक सड़क पर पड़े पत्थर व कंकड़ साफ नहीं कर लेता, तब तक भोजन करने की इच्छा नहीं होती। सरकार की नजर में हम रिटायर जरूर हुए हैं लेकिन अपनी नजरों में अभी भी जवानों को पीछे करने की हिम्मत रखता हूं। जगत चंद कहते हैं कि सरकार मुझे पेंशन दे रही है और जिस सड़क की वजह से पेंशन मिल रही है तो हमारा फर्ज बनता है कि जब तक शरीर में जान है, तब तक अपने गाँव के आस पास सड़क का ख्याल रखूंगा। तभी सरकार से मिलने वाली पेंशन भी सही रूप में बरकत देगी।
जगत चंद के कर्म कौशल से अभिभूत ग्राम प्रधान विकास मैठाणी और उपेंद्र असवाल कहते हैं कि जब से हमने होश संभाला है, तब से जगत चंद जी यमुनोत्री नेशनल हाईवे में काम करते हुए नजर आए, रिटायर होने के बाद भी वे मोटर मार्ग की देखभाल करने में जुटे रहते हैं। 72 वर्ष से अधिक उम्र होने के बाबजूद वे सड़क पर साफ सफाई और रैन बसेरा की देखभाल कर रहे हैं तो यह बड़ी बात है और यह हमारी युवा पीढ़ी के लिए प्रेणादायक उदाहरण है। वे जगत चंद की की लंबी आयु के लिए ईश्वर से कामना करते हुए दूसरे सेवानिवृत्त कार्मिकों को प्रेरणा लेने की अपेक्षा करते हैं।

टीम यमुनोत्री Express

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