बड़कोट/उत्तरकाशी।राजेन्द्र सिंह रावत राजकीय महाविद्यालय टटाऊ, बड़कोट में छात्र-छात्राओं का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। छात्र-छात्राएं स्नातकोत्तर (पीजी) कक्षाएं शुरू करने, छात्र-छात्राओं के लिए नियमित बस सेवा उपलब्ध कराने, महाविद्यालय की चारदीवारी का निर्माण कराने तथा डंडागांव और टटाऊ के बीच मोटर मार्ग एवं पुल निर्माण की मांग को लेकर दसवें दिन भी अनिश्चितकालीन धरने पर डटे रहे। मांगों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से छात्रों में रोष व्याप्त है।
धरने पर बैठे छात्रों का कहना है कि बड़कोट, पुरोला और डाकपत्थर महाविद्यालयों की स्थापना लगभग एक ही समय हुई थी, लेकिन पुरोला और डाकपत्थर महाविद्यालयों में वर्षों से पीजी कक्षाएं संचालित हो रही हैं, जबकि बड़कोट महाविद्यालय के छात्र आज भी इस सुविधा से वंचित हैं। इसके कारण क्षेत्र के विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए अन्य शहरों का रुख करना पड़ता है।
छात्रों ने कहा कि महाविद्यालय में नियमित बस सेवा का अभाव होने से दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों को प्रतिदिन भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही महाविद्यालय परिसर की चारदीवारी नहीं होने से सुरक्षा संबंधी समस्याएं बनी रहती हैं, जिससे छात्र-छात्राओं को असुविधा का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा डंडागांव और टटाऊ के बीच सड़क और पुल का निर्माण क्षेत्र की लंबे समय से लंबित मांग है।
छात्र नेताओं का कहना है कि वे कई बार मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मिलकर अपनी मांगें रख चुके हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। सरकार और संबंधित विभागों द्वारा कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और उग्र करते हुए भूख हड़ताल शुरू की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
धरने में एबीवीपी छात्र सम्पन्न बहुगुणा, छात्रा निकिता, धीरज रौंटा, दुर्व टम्टा, सौरभ, प्राची, रितिका, नमन, ऋषभ, गौरव और रोहित सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। आंदोलन को क्षेत्र के अभिभावकों एवं स्थानीय लोगों का भी समर्थन मिल रहा है। छात्रों ने सरकार से शीघ्र उनकी मांगों पर निर्णय लेकर बड़कोट क्षेत्र के विद्यार्थियों के हित में आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।

