Hindi news (हिंदी समाचार) , watch live tv coverages, Latest Khabar, Breaking news in Hindi of India, World, Sports, business, film and Entertainment.
उत्तरकाशी बड़ी खबर राज्य उत्तराखंड

आस्था।सरनौल की श्री माता रेणुका वैदिक यज्ञशाला बनी आस्था का केंद्र, वैदिक यज्ञ से गूंज रही यमुना घाटी… पढ़ें खबर।

 

 

बड़कोट, उत्तरकाशी।यमुना घाटी के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध सरनौल गांव में आचार्य मनोज सेमवाल द्वारा निर्मित श्री माता रेणुका वैदिक यज्ञशाला इन दिनों श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। केदारखंड के पावन रेणुकाद्रि पर्वत पर स्थित इस प्राचीन धार्मिक स्थल पर अधिष्ठात्री देवी श्री माता रेणुका की कृपा से स्थापित यज्ञशाला में उत्तराखण्ड के मूर्धन्य अग्निहोत्री ब्राह्मणों द्वारा विश्व शांति, लोककल्याण और मानव कल्याण की कामना के साथ वैदिक यज्ञ एवं अग्निहोत्र का आयोजन किया जा रहा है।

यज्ञशाला का निर्माण पारंपरिक वैदिक मान्यताओं तथा प्राचीन भारतीय स्थापत्य शैली के अनुरूप किया गया है। यहां प्रतिदिन वैदिक मंत्रों के सस्वर उच्चारण के बीच विधि-विधानपूर्वक हवन, अग्निहोत्र और यज्ञ संपन्न हो रहे हैं। यज्ञशाला में गूंजते वैदिक मंत्र और हवन की दिव्य सुगंध से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, श्रद्धा और भक्ति से ओत-प्रोत दिखाई दे रहा है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचकर यज्ञ में आहुति अर्पित कर धर्मलाभ प्राप्त कर रहे हैं।

आचार्य मनोज सेमवाल ने बताया कि वैदिक परंपरा में यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति, समाज और मानव जीवन के संतुलन का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। उन्होंने कहा कि ऋग्वेद का प्रथम मंत्र “अग्निमीळे पुरोहितम्…” अग्नि और यज्ञ की महिमा का वर्णन करता है तथा अग्नि को देवताओं तक आहुति पहुंचाने वाला दिव्य माध्यम बताया गया है।

उन्होंने बताया कि विष्णु सहस्रनाम में भगवान विष्णु को स्वयं यज्ञ का स्वरूप माना गया है, जबकि दुर्गा सप्तशती में हवन एवं चंडी यज्ञ को आध्यात्मिक शक्ति, शांति, सुरक्षा तथा नकारात्मक शक्तियों के नाश का प्रभावी साधन बताया गया है। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार शनिवार के दिन देवीयाग का विशेष महत्व होता है और इस दिन किए गए यज्ञ को अत्यंत फलदायी माना जाता है।

आचार्य सेमवाल ने कहा कि आधुनिक समय में भी यज्ञ के वैज्ञानिक पहलुओं पर विभिन्न स्तरों पर अध्ययन किए गए हैं। कुछ अध्ययनों में हवन में प्रयुक्त घी, समिधा एवं औषधीय जड़ी-बूटियों से उत्पन्न धुएं के वातावरण पर सकारात्मक प्रभाव तथा कुछ प्रकार के सूक्ष्म जीवों की संख्या में कमी आने के संकेत मिले हैं। साथ ही मंत्रोच्चार, ध्यान और सामूहिक प्रार्थना को मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और सामाजिक समरसता से भी जोड़ा जाता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इन वैज्ञानिक पहलुओं पर अभी भी विभिन्न शोध जारी हैं और अलग-अलग अध्ययनों में अलग-अलग निष्कर्ष सामने आए हैं।

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि सरनौल की यह वैदिक यज्ञशाला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बन रही है, बल्कि उत्तराखण्ड की प्राचीन वैदिक परंपरा, संस्कृति और सनातन ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। यज्ञशाला में प्रतिदिन श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि वैदिक संस्कृति के प्रति लोगों का विश्वास और जुड़ाव लगातार मजबूत हो रहा है।

Related posts

बड़ी खबर। पेयजल समस्या को लेकर सरकार जगाने को बुद्धि -शुद्वि यज्ञ… पढ़ें।

Arvind Thapliyal

*कर्णप्रयाग महाविद्यालय में एनएसएस के तत्वावधान में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का हुआ आयोजन*

Team Yamunotri Express

उत्तरकाशी :पुलिस ने ढाई हजार के ईनामी दो अभियुक्तों को किया गिरफ्तार

Jp Bahuguna

You cannot copy content of this page