बड़कोट।चार धाम शीतकालीन दर्शन तीर्थ यात्रा के प्रथम पड़ाव में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के सानिध्य में दस राज्यों से पहुंचे डेढ़ सौ से अधिक श्रद्धालुओं का दल मंगलवार को यमुनाजी के शीतकालीन पूजा स्थल खुशीमठ पहुँचा। तीर्थयात्रियों के पहुंचने पर तीर्थ पुरोहितों, पुजारियों और स्थानीय जनता द्वारा पारंपरिक रीति से भव्य स्वागत किया गया।
यात्रा के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि उत्तराखंड सदियों से देवभूमि और संत-महात्माओं की तपस्थली रही है। उन्होंने कहा कि चारधामों में प्राचीन परंपरा अनुसार छह महीने देवता स्वयं पूजा स्वीकार करते हैं और छह महीने मानव द्वारा पूजा-अर्चना की जाती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि धामों में कपाट बंद होने के बाद पूजा बंद होने की जो गलत धारणा लोगों में बनी है, वह सही नहीं है। शीतकालीन पूजा स्थलों में भी उन्हीं देवताओं की विधिवत पूजा होती है, और यहां दर्शन करने से ग्रीष्मकालीन धामों के समान ही पुण्य फल प्राप्त होता है।
शंकराचार्य ने कहा कि शीतकालीन यात्रा का उद्देश्य लोगों में यह संदेश पहुँचाना है कि धार्मिक परंपराओं एवं भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप पूजा स्थलों का परिवर्तन अनादिकाल से होता आया है तथा शीतकालीन धाम भी समान रूप से पवित्र और शक्तिपीठ हैं।
इस अवसर पर श्री यमुनोत्री मंदिर समिति के सचिव सुनील उनियाल, उपाध्यक्ष संजीव उनियाल, सहसचिव पं. गौरव उनियाल, कोषाध्यक्ष प्रदीप उनियाल, संरक्षक ज्योति प्रसाद उनियाल, जिला पंचायत सदस्य बीना चौहान, डंडी स्वामी मुकुंदानंद, चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत के महासचिव डॉ. बृजेश सती, अनुरुद्ध उनियाल, ब्रह्मकपाल तीर्थ पुरोहित अध्यक्ष उमेश सती सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

