उत्तरकाशी/सुनील थपलियाल।भैय्या दूज के पावन पर्व पर चार धाम यात्रा के प्रथम तीर्थ यमुनोत्री धाम के कपाट वैदिक मंत्रोच्चारण और विशेष पूजा-अर्चना के बीच दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर शीतकाल के लिए विधिविधानपूर्वक बंद कर दिए गए। इस दौरान पूरा धाम ‘जय मां यमुना’ के जयकारों से गूंज उठा।
कपाट बंद होते ही मां यमुना की उत्सव मूर्ति को डोली यात्रा के साथ उनके शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली गांव के लिए विधि-विधानपूर्वक रवाना किया गया। अब अगले छह माह तक मां यमुना की नित्य पूजा-अर्चना और श्रद्धालुओं के दर्शन खरसाली में ही संपन्न होंगे।
इस वर्ष अक्षय तृतीया पर 30 अप्रैल को कपाट खोले गए थे। परंपरा के अनुसार गुरुवार सुबह से ही विशेष पूजा-अर्चना आरंभ हुई। श्रद्धालुओं ने मां यमुना के दर्शन कर पवित्र यमुना जल में स्नान किया। इसी दौरान शनिदेव महाराज की डोली भी यमुनोत्री धाम पहुंची। उन्होंने यमुना नदी में स्नान कर अपनी बहन मां यमुना के साथ विशेष पूजा में भाग लिया। इस अवसर पर तीर्थ पुरोहितों द्वारा यमुना मां और शनिदेव की संयुक्त आरती की गई।
पूजन के उपरांत निर्धारित मुहूर्त पर 12:30 बजे यमुनोत्री मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए गए। इसके साथ ही यमुना जी की उत्सव मूर्ति को भक्तों की उपस्थिति में डोली यात्रा के माध्यम से खरसाली के लिए विदा किया गया। इस दौरान सैकड़ों श्रद्धालु, तीर्थ पुरोहित और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
यमुनोत्री धाम के तीर्थ पुरोहित पुरुषोत्तम उनियाल ने बताया कि कपाट शीतकाल के लिए पारंपरिक रीति से बंद कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अब श्रद्धालु मां यमुना के दर्शन खरसाली गद्दीस्थल मंदिर में छह माह तक कर सकेंगे। उन्होंने राज्य सरकार से खरसाली तक सर्दियों में यात्री सुविधाएं बनाए रखने की मांग की, ताकि शीतकालीन यात्रा सुचारू रूप से चल सके और स्थानीय लोगों का स्वरोजगार भी बना रहे।
इस अवसर पर एसडीएम बृजेश कुमार तिवारी, मंदिर समिति सचिव सुनील उनियाल, प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल, कोषाध्यक्ष प्रदीप उनियाल, गिरीश उनियाल, बागेश्वर उनियाल, महादेव उनियाल, विपिन उनियाल सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

