बड़कोट/अरविन्द थपलियाल। तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत दारसौं में उफनती नदी में यह जर्जर पुल बड़े खतरे को न्योता दे रहा है।
हांलांकि सरकार और प्रशासन की जिला योजना के नाम पर कही ऐसी योजनाएं हैं जो कागजों और फाईलों से बहार नहीं निकलती लेकिन यहां मूलभूत समस्या को लेकर प्रशासन कभी धन का रोना रोता है और कभी क्षमता का।
मामला तहसील बड़कोट के ग्राम पंचायत दारसौं का है जहां आधा दर्जन से अधिक गांवों का यह संपर्क मार्ग है और कास्तकारों की धान की खेती इसी तोक में है लेकिन जिला प्रशासन के कानो तक जूं तक नहीं रेंगती।
मालूम हो कि यह जर्जर पुल ग्रामीण विकास विभाग का है और इसकी सूचना विगत कही वर्षो से प्रशासन को दी जा रही है लेकिन कोई सुध लेने को तैयार नहीं है।
सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार अरविन्द थपलियाल ने बताया कि वह पिछले तीन चार वर्षों से इसकी सूचना खबरों के माध्यम और लिखित रूप मे उप जिलाधिकारी बड़कोट और वर्तमान में मुख्य विकास अधिकारी उत्तरकाशी को पिछले वर्ष से दे रहें हैं लेकिन प्रशासन और विभाग का लाचार रवैया किसी बडे खतरे का इंतजार कर रहा है।
ग्राम पंचायत प्रधान दारसौ श्रीमती पुष्पा देवी ने मामले पर बताया कि आजकल वर्षात है और गडोगी तोक के दो नंदियों के मुहाने पर यह जर्जर पुल है और नदियां उफान पर हैं और कभी भी कोई खतरा हो सकता है क्योंकि ग्रामीणों की धान की खेती इसी तोक में हैं, प्रधान ने बताया कि यदि कोई यहां घटना होती है तो संपूर्ण जिबेंदारी प्रशासन की होगी।
अब इस जर्जर पुल को लेकर दारसौं के ग्रामीणों के सामने डर सता रहा कि वहां कभी भी कोई जन हानी और पशु हानी हो सकती है यदि समय से सिस्टम नहीं जागा।

