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उत्तरकाशी बड़ी खबर राज्य उत्तराखंड

शिवालय में एक लोटा जल चढाने मात्र से होता है कल्याण:आयुष कृष्ण

बड़़कोट/अरविन्द थपलियाल।

शिव महापुराण के मर्मज्ञ व्यास पंडित आयुष कृष्ण नयन ने कहा है कि भगवान शिव जी पर एक लोटा जल चढ़ा देने मात्र से ही हमारी सभी इच्छाएं और बड़ों कामनाएं पूर्ण हो जाती है। इसके लिए आवश्यक है कि जब हम जल चढ़ाएं निष्कपट भाव से चढ़ाएं ।

पंडित नयन आज यहां डख्याट गाँव के टटाउ शिवमंदिर में श्रद्धालुओं से खचाखच भरे विशाल मैदान में शिव महापुराण कथा के पहले दिन श्रद्धालुओं को कथा का श्रवण करा रहे थे कथा के प्रारंभ में व्यासपीठ का पूजन डख्याट गाव से दूसरे गांव विवाहित महिलाओं (दयाणियो)
ने किया । कथा तटेश्वर महादेव के सानिध्य में व राजा रघुनाथ बनाल,यमदग्नि ऋषि मुनिथान,कैलू मानसीर कुथनॉर, लुदेश्वर महादेव मुगरसन्ति,कुलदेवी चंद्रवदनि की देव डोलियों के दर्शन कथा में श्रदालुओ को एकसाथ मिल रहे है।
भक्तजनों को कथा का श्रवण कराते हुए आयुष कृष्ण नयन ने कहा कि व्यक्ति का पूरा जीवन यह जानने में लग जाता है कि उसका जन्म क्यों हुआ ? हकीकत यह है कि हमारा जन्म अपने पूर्व जन्म के प्रतिफल को पाने और भगवान का भजन करने के लिए हुआ है। यदि हमने पूर्व जन्म में अच्छे कर्म किए होंगे तो इस जन्म में प्रतिफल के रूप में हमें आनंद की प्राप्ति होगी।
हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि विपरीत परिस्थिति में भगवान शिव ही तुम्हारे साथ रहेंगे । भगवान शिव को जल तो चढ़ाना लेकिन छल कपट से मत चढ़ाना। मन में कपट रखकर जल मत चढ़ाना। निष्कपट भाव से, निर्मल मन से निर्मल ह्रदय से शिव जी को जल चढ़ाएं । शिव पुराण महा कथा से महिलाओं में यह भाव आ गया है कि अपन शंकर जी के और शंकर जी अपने हैं। हमें जीवन में जो कुछ मिला है वह हमारे कर्मों से मिला है। आगे भी जो कुछ मिलेगा वह अपने कर्मों से ही मिलेगा।
पूजन की वस्तुएं विसर्जित करने के लिए जरूरी नहीं है कि नदी में ही डाला जाए। कहीं भी एक गड्डा करके उसमें भी यह वस्तुएं डाली जा सकती है । यदि हर वस्तु को हम पवित्र नदी में ही ले जाकर विसर्जित करेंगे तो नदिया अपवित्र हो जाएंगी।
उन्होने कहा कि जहां पर भगवान प्रतिष्ठित रूप से बैठते हैं वह मंदिर कहलाता है और जहां शिवजी बैठते हैं वहां शिवालय कहलाता है। हर शिव मंदिर में शिव जी की प्रतिमा के सामने नंदी बैठा होता है वहां पर एक सूत्र बंधा होता है। जो कि यह साबित करता है कि हर दिन शिवजी नंदी पर सवार होकर इस मंदिर से गुजर कर जाते हैं । जो व्यक्ति बड़ा हो जाता है, धनपति बन जाता है, ऊंचे पद पर पहुंच जाता है तो उसकी रोटी और हंसी कम हो जाती है । वह व्यक्ति भोजन में कम ही रोटी खाता है और सामान्य रूप से बैठकर हंसी मजाक करने में उसे अपने पद प्रतिष्ठा की हानि महसूस होती है। जब आप बड़े पद पर पहुंचकर भगवान के मंदिर में सेवा करते हो तो हजारों लोगों को प्रेरणा देते हो। इस मौके पर व्यासपीठ के साथ आचार्य बृजेश नौटियाल, ग्राम कौलगाव व गुलाड़ी के कुल पुरोहित सहित हजारों श्रद्धालू मौजूद थे।

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