उत्तरकाशी/ अरविन्द थपलियाल। उत्तराखंड में एक तरफ स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त करने की बात होती है और दूसरी ओर उत्तरकाशी जिला मुख्यालय का महिला चिकित्सालय रेफर सेंटर बन कर रह गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यहां से विगत दो दिनों में 16 से 17 गर्भवती महिलाओं को हायर सेंटर रेफर किया जा चुका है। जबकि पिछले माह 35 गर्भवती महिलाओं को हायर सेंटर रेफर किया गया था जो कि सरकार के ग्राम व जिला स्तर पर ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने का जुमला हवाई सावित होता नजर आ रहा है।
मालूम हो कि उत्तरकाशी के महिला चिकित्सालय में 3 चिकित्सकों की तैनाती है जिनमे से दो व्यक्तिगत कारणों से छुट्टी पर चल रही है। पंज्याला डुंडा गाँव निवासी हिम्मत सिंह ने बताया कि उनकी पत्नी पूनम का महिला चिकिसालय के चिकित्सक विगत 9 महीनों से लगातार चेकप करवा रहे है। जब अस्पताल में प्रसव करवाने का समय आया तो प्लेटलेट कम बताकर देहरादून रेफर कर दिया गया। उन्होंने बताया कि यदि उनकी पत्नी में प्लेटलेट की कमी थी तो पहले चेकप के दौरान क्यो नही बताई गयी उनका कहना है कि उनकी पत्नी पूनम का जबकि यह दूसरा प्रसव है। इन्होंने महिला चिकित्सको पर आरोप लगाया कि उत्तरकाशी महिला चिकिसालय में अधिकतर लोगों को मामला क्रिटिकल बताकर रेफर किया जा रहा है। जिस कारण गरीब ग्रामीणों पर अत्यधिक आर्थिक बोझ पड़ रहा है लेकिन यहां पर सुनने वाला कोई नही है।
वहीं जब इस बात को लेकर हमने जब पड़ताल कर महिला चिकित्सक से बात की तो उन्होंने बताया कि उत्तरकाशी में अधिकतर महिलाओं को प्लेटलेट की कमी या अन्य क्रिटिकल मामलों को लेकर ही रेफर किया जाता है जबकि अधिकांश प्रसव चिकिसालय में ही करवाए जाते है। उत्तरकाशी में प्लेटलेट उपलब्धता की कोई सुविधा न होने के कारण प्रशुति महिलाओं को रेफर किया जाता है ताकि सुरक्षित प्रसव हो सके। उनके कहने में कितनी सच्चाई है इसका जवाब तो महिला चिकिसालय के चिकित्सकों के पास है। रेफर सेंटर बनने के सवाल को लेकर जब सीएमओ उत्तरकाशी को पूछा तो उन्होंने सीएमएस से जानकारी लेने की सलाह देकर पल्ला झाड़ दिया वही जबकि सीएमएस छुट्टी पर चल रहे हैं। उत्तरकाशी महिला चिकिसालय का वर्तमान में यह हाल है। उत्तराखंड सरकार का पीएचसी,सीएचसी व जिला स्तर पर ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के जुमले पर चिकित्सको की गैर जिम्मेदारी पलीता लगा रही है।
ऐसे में अब सवाल यह उठ रहे हैं कि आखिर कबतक स्वास्थ्य सुविधाओं की तरफ सरकारें काम करेगी कब सुधरेगी जनपद की स्वास्थ्य सुविधाएं?
previous post

