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उत्तरकाशी बड़ी खबर राज्य उत्तराखंड

विकास के नाम पर पर्यावरण से खिलवाड़ का आरोप, पेड़ों के कटान पर उठे सवाल,’विकास जरूरी, लेकिन प्रकृति की कीमत पर नहीं’ — समाजसेवी एवं ग्लेशियर लेडी शांति ठाकुर…. पढ़ें खबर।

 

 

 

 

बड़कोट, उत्तरकाशी। उत्तराखंड में सड़क चौड़ीकरण एवं विभिन्न विकास परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर प्रस्तावित और हो रहे पेड़ों के कटान को लेकर पर्यावरण प्रेमियों ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि विकास कार्य आवश्यक हैं, लेकिन यदि उन्हें पर्यावरणीय संतुलन और वैज्ञानिक मानकों की अनदेखी कर किया जाएगा तो भविष्य में प्रदेश को गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना करना पड़ सकता है।

 

शुक्रवार को बड़कोट में पत्रकारों से बातचीत करते हुए समाजसेवी एवं ‘ग्लेशियर लेडी’ शांति ठाकुर ने कहा कि एक ओर सरकार पर्यावरण दिवस, हरेला जैसे आयोजनों के माध्यम से वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है, वहीं दूसरी ओर विकास परियोजनाओं के नाम पर हजारों हरे-भरे पेड़ों के कटान की योजनाएं बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति पर्यावरण संरक्षण की नीति और व्यवहार के बीच स्पष्ट विरोधाभास को दर्शाती है।

 

शांति ठाकुर ने लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के पर्यावरण संरक्षण संबंधी अभियान का समर्थन करते हुए उन्हें देशहित और हिमालयी क्षेत्रों के संरक्षण के लिए संघर्ष करने वाला समाजसेवी बताया। उन्होंने सरकार से उनके द्वारा उठाए गए पर्यावरणीय मुद्दों पर गंभीरता से विचार कर संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की। साथ ही उन्होंने सोनम वांगचुक से भी सकारात्मक पहल करते हुए आंदोलन स्थगित करने का अनुरोध किया।

 

उन्होंने पहाड़ों में बड़े पैमाने पर हो रहे खनन पर भी नाराजगी जताते हुए कहा कि “पर्वतों का सफेद सोना” कहे जाने वाले खनिज संसाधनों का अंधाधुंध दोहन प्राकृतिक संतुलन के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। उनका कहना था कि यदि वन संपदा और पर्वतीय संसाधनों का इसी प्रकार दोहन होता रहा तो इसका सीधा असर जैव विविधता, जल स्रोतों, स्थानीय जलवायु तथा हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ेगा। इससे जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान जैसी चुनौतियां और अधिक गंभीर हो सकती हैं।

 

उन्होंने स्पष्ट किया कि पर्यावरण प्रेमी विकास के विरोधी नहीं हैं, बल्कि संतुलित, वैज्ञानिक एवं आवश्यकता आधारित विकास के पक्षधर हैं। उनका कहना है कि सड़कों का सीमित एवं वैज्ञानिक चौड़ीकरण कर यातायात सुविधाओं में सुधार किया जा सकता है, जिससे पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुंचे।

 

उन्होंने सरकार से विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाते हुए निर्णय लेने की मांग की, ताकि उत्तराखंड की प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित रहे और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित पर्यावरण मिल सके।

 

इस अवसर पर संदीप चौहान, अनुराधा चौहान, कल्पना ठाकुर, कमल सिंह चौहान सहित अन्य पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे।

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