सुनील थपलियाल /जयप्रकाश बहुगुणा
बड़कोट/उत्तरकाशी
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में तैनात शिक्षिका मनीषा रावत,हिमानी रमोला, अनुसेविका श्रीमती प्यारदेई ,ग्रामीण मोती सिंह विष्ट और कैलाश विष्ट ने आसमानी आफत के मंजर को नजदीक से देखा। तेज बारिश और चारो ओर से पत्थरों के गिरने की आवाज में सिर्फ अपनी जान को बचाने की सोच के साथ सड़क की ओर भागे। दर्जनभर लोग सिर्फ तन पर कपड़े बचा पाये।
मलवे में सनी शिक्षिका मनीषा को सहयोगी शिक्षिक हिमानी ने जैसे तैसे कमरे से बाहर लाया जहाँ भारी बारिश के बीच बड़े बड़े बोल्डर की आवाज और लोगो की चिल्लाहट सुनाई दे रही थी। डरी सहमी मनीषा ने रोते रोते बताया कि भारी बारिश के बीच मकान मालकिन का फोन आया पर आवाज सुनाई नही दी फिर मकान मालिक स्वयं आ गयी जिन्होंने सुरक्षित स्थान जाने को कहा जैसे ही कुछ सम्भल पाते तब तक मलवे ने दीवार तोड़ दी पूरा कमरा मलवे में तब्दील हो गया, जैसे तैसे दोनों शिक्षिकाएं सड़क तक पहुँचे ,पूरी रात बारिश में सड़क में बिताई।
कैम्प निर्वाणा के प्रबंधक कैलाश विष्ट ने बताया कि ढेड़ बजे रात तेज बारिश होने व पत्थरों की आवाज आते ही दूसरे साथी लड़के को लेकर सुरक्षित स्थान पर आ गए थे उन्होंने बताया की 4 टेंट ,तीन कॉटेज ,दो कार और एक स्कूटी मलबे में दब कर पूर्णत क्षतिग्रस्त हो गए। ग्रामीण मोती सिंह बिष्ट ने बताया कि पूरे मकान के कमरो में मलबा आ गया, एक गाय और बछड़ा जिंदा दफन हो गए और आल्टो कार और मोटरसाइकिल भी क्षतिग्रस्त हो गए ।उन्होंने कहा कि अब तन पर सिर्फ कपड़े बचे है ।बाकि सारा घर में रखा सामान मलवे में दबकर नष्ट हो गया है !

