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उत्तरकाशी :भड़गावं थोक की ऐतिहासिक परम्पराओं को संजोये हैं नाग देवताओं के मेले

जयप्रकाश बहुगुणा 
बड़कोट /उत्तरकाशी
     उत्तराखंड में यूँ तो विश्व प्रसिद्ध चारधाम यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ स्थित हैं व यहां हर वर्ष लाखों की संख्या में देश विदेश के कोने कोने से श्रद्धालु दर्शनों के लिए आते हैं  लेकिन देवभूमि के नाम से विख्यात उत्तराखंड के हर क्षेत्र में लोगों की अपार आस्था के प्रतीक देव मंदिर स्थित हैं जहां अपनी समृद्ध पौराणिक संस्कृति को संजोये हुए लोग इन देवी देवताओं के मेलों का सदियों से आयोजन करते हैं !ऐसे ही अनूठे मेलों का दिव्य व भव्य आयोजन होता है इन दिनों उत्तरकाशी जनपद के बड़कोट व पुरोला तहसील क्षेत्र की भड़गावं थोक के नाम से प्रसिद्ध एक दर्जन से अधिक गावों में बड़कोट तहसील की पट्टी बड़कोट व मुँगरसंती के गावों पौंटी, मोल्डा, डण्डाल गांव, खांसी,पलेठा  व पुरोला तहसील के कमल सिराई पट्टी के हुडोली, पानीगांव, नैलाडी, कन्ताडी, बिनाई, गोठूका आदि गावों में नाग देवताओं के वैष्णव मेलों का आगाज हो गया है !इन मेलों में भुवनेश्वर व पवनेश्वर नाम से विख्यात नाग देवता अपने थान में स्थित मंदिर गर्व गृह से श्रद्धालुओ को दर्शन देने बाहर निकलते हैं, व अपनी वृति (थोक )के गावों में भ्र्मण कर क्षेत्र वाषियों को सुख समृद्धि के लिए आशीर्वाद देते हैं !नाग देवताओं के मेले शुरू होने से दस दिन पूर्व से इन दर्जन भर गावों में मांस मदिरा का सेवन पूर्णतः वर्जित हो जाता है !पौराणिक कथनों के अनुसार ऐसी मान्यता है कि जब नाग देवताओं के मेले आरम्भ होने से पहले उनका जागरण करना शुरू होता है तो जिस ब्यक्ति के घर में मांस मदिरा का सेवन होगा वहां सर्प  रूप में नाग देवता प्रकट होकर नुकसान पहुंचाते हैं, असाढ़ संक्रांति से ग्राम पौंटी से शुरू हुए नाग देवताओं के मेले दो सप्ताह तक अलग अलग गावों में देव डोलियों के साथ धूमधाम से मनाये जायेंगे, इन मेलों के दौरान लोक संस्कृति के कई रंग देखने को मिलते हैं, यहां मेलों के दौरान रवांई की समृद्ध लोक संस्कृति पर आधारित लोक गीत, लोकनृत्य, रासु -तांदी की अप्रतिम प्रस्तुतियां देखने को मिलती है !नाग देवताओं के दो स्थाई थान है प्रथम ग्राम मोल्डा w द्वितीय ग्राम पौंटी, देवताओं का वास एक साल मोल्डा व एक साल पौंटी थान में रहता है, नाग देवता वर्षभर में सिर्फ इन मेलों के दौरान ही अपने भक्तों को आशीर्वाद देने गर्वगृह से बाहर आते हैं, वर्षभर इनकी पूजा अर्चना स्थाई तौर पर इनके पुजारी बहुगुणा लोग मंदिर में ही करते हैं !मंगलवार को पौंटी में मेला विराम के बाद देव डोलियां मोल्डा को प्रस्थान करेंगी !ततपश्चात अन्य गाँवो में मेलों का आयोजन क्रमश होगा !मेले के दौरान बहुगुणा पुजारी व बाजगी बंधु देव डोलियों के साथ रहते हैं

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