सुनील थपलियाल
देहरादून।
तिब्बती यूथ कांग्रेस (टीवाईसी) ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की 105वीं स्थापना वर्षगांठ के अवसर पर देहरादून में प्रदर्शन कर चीन के प्रस्तावित ‘जातीय एकता और प्रगति कानून’ की कड़ी निंदा की। संगठन ने कहा कि यह कानून तिब्बती पहचान, भाषा, धर्म और संस्कृति के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा है तथा इसके माध्यम से तिब्बतियों को जबरन मुख्यधारा में आत्मसात करने की नीति को कानूनी रूप दिया जा रहा है।

टीवाईसी ने आरोप लगाया कि चीन लंबे समय से राजनीतिक दमन, सांस्कृतिक हस्तक्षेप और सरकारी नीतियों के जरिए तिब्बती समुदाय की विशिष्ट पहचान को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है। संगठन के अनुसार नया कानून इसी नीति को और अधिक मजबूत करेगा तथा तिब्बती राष्ट्रीय पहचान को समाप्त करने की दिशा में कदम है।
प्रदर्शन के दौरान टीवाईसी ने कहा कि किसी भी समुदाय की भाषा, संस्कृति और धार्मिक परंपराएं उसकी पहचान का आधार होती हैं और उन्हें किसी एक राष्ट्रीय पहचान में समाहित नहीं किया जा सकता। संगठन ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त चिंताओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि चीन की नीतियां अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के विपरीत हैं।
टीवाईसी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय, संयुक्त राष्ट्र, लोकतांत्रिक देशों और मानवाधिकार संगठनों से चीन पर दबाव बनाने, इस कानून की निगरानी करने तथा तिब्बती लोगों के सांस्कृतिक और धार्मिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। संगठन ने कहा कि तिब्बती समुदाय अपनी पहचान, स्वतंत्रता और मूल अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखेगा।

