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यमुनाघाटी में शीतलहर का कहर, इंसानों से ज्यादा मवेशी हो रहे प्रभावित,पढ़े खबर….

सुनील थपलियाल
उत्तरकाशी।
यमुनाघाटी में मौसम की मार इन दिनों इंसानों के साथ-साथ मवेशियों पर भी भारी पड़ रही है। कड़ाके की शीतलहर के चलते हालात ऐसे हैं कि लोगों को दिन-रात अलावों का सहारा लेना पड़ रहा है। ठंड से राहत पाने के लिए आवारा पशु (गाय व बछड़ा) भी अलावों के पास आकर खड़े हो जा रहे हैं, जो ठंड की गंभीरता को साफ दर्शाता है।
गौरतलब है कि दिसंबर 2025 का अंतिम सप्ताह चल रहा है, लेकिन अब तक न तो बारिश हुई है और न ही ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी। इसके चलते ठंड “कोरी ठंड” के रूप में लोगों को ज्यादा चुभ रही है। सुबह और शाम के समय शीतलहर इतनी तेज हो जाती है कि आमजन मानस के साथ-साथ मवेशियों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यमुनोत्री धाम के ऊपर स्थित बंदरपूंछ पर्वत श्रृंखला, जो सामान्यतः सालभर बर्फ से ढकी रहती थी, इस वर्ष लगभग खाली पड़ी हुई है। बर्फबारी न होने से न केवल मौसम का संतुलन बिगड़ रहा है, बल्कि इसका सीधा असर कृषि पर भी पड़ रहा है।
काश्तकारों में इस स्थिति को लेकर गहरी चिंता देखी जा रही है। किसानों का कहना है कि दिसंबर माह की बर्फबारी फसलों के लिए संजीवनी का काम करती है, जिससे जमीन में नमी बनी रहती है और आने वाली फसलों को मजबूती मिलती है। लेकिन इस बार बारिश और बर्फबारी के अभाव में फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव साफ नजर आने लगा है।
इधर नगर पालिका बड़कोट क्षेत्र में लगाए गए अलावों के सहारे न सिर्फ स्थानीय लोग, बल्कि बड़ी संख्या में आवारा पशु भी ठंड से राहत पाने को मजबूर हैं। बदलते मौसम के इस मिजाज ने जहां आम जनजीवन को प्रभावित किया है, वहीं कृषि और पशुधन के लिए भी चिंता बढ़ा दी है।

टीम यमुनोत्री Express

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