बड़कोट(उत्तरकाशी)देशभर में जहां दीपावली का पर्व अक्टूबर माह में मनाया गया, वहीं उत्तरकाशी जनपद की यमुनाघाटी के गैर गांव, गंगटाड़ी, कुथनौर सहित रवांई, जौनपुर और जौनसार क्षेत्र में परंपरागत मंगसीर की बग्वाल, जिसे रवांई में देवलांग और जौनपुर में बड़ी दीपावली कहा जाता है, बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। पर्व की मुख्य परंपरा के अनुसार विशालकाय देवदार के पेड़ को खड़ा कर उसे अग्नि समर्पित किया जाता है।
मान्यता है कि भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खबर पर्वतीय कंदराओं में एक माह बाद पहुंची थी। दूसरी लोककथा वीर माधो सिंह भंडारी के युद्ध से लौटने की देरी से मिली सूचना से भी इस पर्व की जोड़ती है। यमुनाघाटी में राजा रघुनाथ को इष्ट देव मानने वाले श्रद्धालु सदियों से इस पर्व को अंधेरे से उजाले की ओर विजय के रूप में मनाते आ रहे हैं।
देवलांग पर्व के लिए ग्रामीण जंगल से विशाल देवदार का पेड़ लाते हैं। 65 गांवों के लोग शाटी और पानसाई दो हिस्सों में विभाजित होकर पेड़ पर सूखी लकड़ियों के गुच्छे बांधते हैं। इसके बाद डंडों के सहारे पेड़ को खड़ा किया जाता है और अग्नि प्रज्वलित की जाती है। शंखनाद, ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक नृत्यों के बीच श्रद्धालु भगवान राजा रघुनाथ की स्तुति करते हुए पर्व को धूमधाम से मनाते हैं।
क्षेत्र की समृद्धि और राजकुशलता के लिए रघुनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना करना यहां की सदियों पुरानी परंपरा है। सरकार द्वारा गैर गांव के देवलांग पर्व को राजकीय मेला घोषित किए जाने के बाद से संस्कृति विभाग की लोकनृत्य टीमें भी यहां प्रस्तुति देने पहुंचती हैं।
गैर गांव के साथ-साथ गंगटाड़ी और कुथनौर में भी देवलांग पर्व उत्साहपूर्ण माहौल में मनाया गया। श्रद्धालुओं ने अपने इष्ट देव से सुख-समृद्धि की कामनाएं कीं।
इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य सुखदेव रावत, रोहित जुड़ियाल, पूजारी सियाराम गैरोला, मोहन गैरोला, प्रदीप गैरोला, लायबर सिंह कलुडा, पवन सिंह, सुरेंद्र सिंह रावत, धनवीर रावत, सोहन गैरोला, लेखा सिंह, सुनील गैरोला, सचिन नौटियाल, दिनेश रावत सहित हजारों की संख्या में मेलार्थी उपस्थित रहे।
बड़कोट फोटो— ग्रामीणों द्वारा पौराणिक देवलांग पर्व का आयोजन, दर्शन को उमड़ी भारी भीड़।

