बड़कोट। पूरे देशभर की तरह बड़कोट में भी बुधवार को विश्वकर्मा पूजा बड़े हर्षोउल्लास से मनाई गई। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान, राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज, जल संस्थान सहित विभिन्न संस्थानों में विश्वकर्मा भगवान की प्रतिमा स्थापित कर श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की गई। राजमिस्त्रियों और कारीगरों ने अपने-अपने औजारों की विशेष पूजा की तथा पुष्पांजलि अर्पित कर कार्य में सफलता की कामना की।
पर्व का महत्व बताते हुए प्रधानाचार्य हरि प्रसाद सेमवाल ने कहा कि
भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का प्रथम अभियंता और शिल्पकार माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार उन्होंने देवताओं के महल, रथ, अस्त्र-शस्त्र और नगरों में द्वारका, इन्द्रप्रस्थ तथा स्वर्गलोक का निर्माण किया। इसी कारण उन्हें देवशिल्पी और वास्तु देवता कहा जाता है।
इधर राज मिस्त्रियों ने स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण किए। औजारों और मशीनों की सफाई कर उन्हें सजाया गया। प्रतिमा स्थापित कर दीपक, धूप, फूल और प्रसाद अर्पित किए गए। औजारों को रोली-चावल से तिलक कर पुष्प चढ़ाए गए और मंत्रोच्चार व आरती के साथ पूजा सम्पन्न हुई।
मान्यता है कि विश्वकर्मा जयंती पर औजारों और मशीनों की पूजा करने से व्यापार में तरक्की, कार्यों में सफलता और जीवन में समृद्धि प्राप्त होती है। इसी कारण बड़कोट में भी कारीगरों व शिल्पियों ने पूरे उत्साह के साथ भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद प्राप्त किया।


