बड़कोट। यमुना नदी के तट पर बसा बड़कोट नगर पालिका में जल संकट गहराने लगा है । गर्मी की शुरुआत भी नही हुई अभी से कई परिवारों को पीने का पानी नही मिल पा रहा है। हालात ये हैं कि जनता के जिम्मेदार नुमाइंदे चुनाव में व्यस्त है और जनता पानी के लिए त्रस्त है ।
प्रसिद्ध कवि गिरीश तिवारी गिर्दा की वर्षों पहले लिखी ये पंक्तियां याद आ गयी ।
“अजी वाह! क्या बात तुम्हारी
तुम तो पानी के व्यापारी
खेल तुम्हारा, तुम्हीं खिलाड़ी,
बिछी हुई ये बिसात तुम्हारी
सारा पानी चूस रहे हो,
नदी-समन्दर लूट रहे हो
गंगा-यमुना की छाती पर
कंकड़-पत्थर कूट रहे हो
उफ!! तुम्हारी ये खुदगर्जी
चलेगी कब तक ये मनमर्जी
जिस दिन डोलेगी ये धरती
सर से निकलेगी सब मस्ती
महल-चौबारे बह जायेंगे
खाली रौखड़ रह जायेंगे
बूंद-बूंद को तरसोगे जब
बोल व्यापारी-तब क्या होगा?
नगद-उधारी-तब क्या होगा??
आज भले ही मौज उड़ा लो
नदियों को प्यासा तड़पा लो
गंगा को कीचड़ कर डालो
लेकिन डोलेगी जब धरती-बोल व्यापारी-तब क्या होगा?
विश्व बैंक के टोकन धारी-तब क्या होगा?
योजनाकारी-तब क्या होगा?
नगद-उधारी तब क्या होगा?
ये पीड़ा किसी अकेले की नही पूरे नगर की है।
यमुना नदी की तट में बसे नगर पालिका बड़कोट के नगरवासी भी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। सरकार ने पेयजल समस्या से निपटने और नगर को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उत्तराखंड जल निगम के माध्यम से एक पंपिंग पेयजल योजना के सर्वे व प्रतिकर के लिए वर्ष 2018-19 में तलाड़ी यमुना नदी से बड़कोट को पम्पिंग योजना में लगभग 70 लाख आये थे इसमें बड़कोट गाँव वासियो को भूमि का प्रतिकर भी मिल गया परन्तु राजनैतिक महत्वाकांक्षा के चलते अभी तक योजना पूर्ण नही बन पाई ,पम्पिंग के निर्माण के लिए क़िस्त नही मिल पाई जिसका खामियाजा रहा कि यमुना तट के वासिंदे प्यासे रहने को मजबूर है। इतना ही नही
नगर वासियो के लिए लगभग 60 लाख की एक पेयजल योजना से पाइप लाइन बिछाकर कनेक्शन प्वाइंट बनाने के साथ-साथ घर-घर कनेक्शन पहुंचाए गये। एक वर्ष तो आपूर्ति व्यवस्था ठीक ठाक रही, इसके बाद इसके पेयजल स्रोत पर पानी न आने से पानी की लाइन सफेद हाथी बनकर नगर वासियो को मुंह चिढ़ा रही है। सामाजिक चेतना की बुलंद आवाज जय हो ग्रुप लागातर बड़कोट पेयजलापूर्ति के लिए योजना हेतु धनराशि की स्वीकृति की मांग करता आ रहा है। ग्रुप के संयोजक सुनील थपलियाल ने विभाग पर आरोप लगाते हुए कहा कि जल निगम की घोर लापरवाही के चलते बड़कोट आज बून्द बून्द के लिए परेशान हो रहा है। यमुना नदी से मसूरी सहित कई कस्बों को विभाग द्वारा पेयजलापूर्ति की व्यवस्था हो रही है तो बड़कोट नगर वासियों को योजना की स्वीकृति में बिलम्ब क्यों हो रहा है।उन्होंने जल्द एस्टीमेट धनराशि स्वीकृति की मांग की है। उन्होंने कहा कि पेयजल स्रोत में पानी पर्याप्त न होने पर विभाग को 2 से 3 टैंकर की व्यवस्था करनी होगी। त्रस्त जनता आरपार के मूड में है इसके लिए विभाग जिम्मेदार है।
उत्तराखंड जल निगम के सहायक अभियंता प्रवीन राज का कहना है कि उक्त पम्पिंग योजना का 2019 में सर्वे और जमीन का प्रतिकर दे दिया गया है और 72.16 करोड़ का एस्टीमेट जलनिगम मुख्यालय जा रखा है और अब जैसे ही एस्टीमेट यानी अनुमान लागत के अनरूप धनराशि मिलेगी वैसे ही पम्पिंग योजना में कार्य शुरू कर दिया जायेगा।
जल संस्थान के अवर अभियंता श्री बिजल्वाण का कहना है कि जल स्रोत पर पानी कम हो गया है । विभाग द्वारा टैंकर की व्यवस्था की गई है। प्रयास रहेगा कि पेयजल आपूर्ति सभी को मिल पाए।
टीम यमुनोत्री Express

