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उत्तरकाशी:हादसों को न्योता दे रहा है बड़कोट-तिलाड़ी मोटरमार्ग, 32 सालों से डामरीकरण नहीं हो पाया शहीदों के नाम पर बने इस मोटरमार्ग का

जयप्रकाश बहुगुणा
बड़कोट/उत्तरकाशी

देश के पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रत्येक गांव को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए एक योजना बनाई थी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जिसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों को सड़क मार्ग से जोड़कर उनके विकास को गति प्रदान की जा सके, आज उसी योजना के तहत पूरे भारतवर्ष में अधिकांश गांव पक्की डामरीकृत मोटरमार्ग से जुड़ गये हैं या जुड़ने वाले हैं।लेकिन उत्तरकाशी जनपद में जलियांवाला बाग कांड की तर्ज पर हुए तिलाड़ी कांड के शहीदों के नाम पर बनाई गई एक सड़क ऐसी है जिसे बने हुए लगभग बत्तीस साल हो गए हैं लेकिन आज तक तिलाड़ी शहीदों के नाम पर बनी इस सड़क का डामरीकरण नहीं हो पाया है।कार्यदाई संस्था लोक निर्माण विभाग व कुछ ठेकेदारों के लिए यह जीर्ण शीर्ण सड़क दुधारू गाय बनी हुई है।इस मोटरमार्ग पर तिलाड़ी में शहीद अमर शहीदों का स्मारक बना हुआ है, जहां पर हर वर्ष शहीद मेले का आयोजन किया जाता है।सम्बन्धित विभाग तिलाड़ी शहीद मेले के दौरान ही इस सड़क के गड्ढे भरते हैं बाकी पूरे साल सड़क मरम्मत के नाम पर बजट ठिकाने लगाने का कार्य चलता रहता है।इस सड़क से रोज दर्जनों स्कूली व लोकल वाहन आवागमन करते हैं, यहां से होकर पॉलिटेक्निक, एमडीएस स्कूल सहित दर्जनों सरकारी स्कूलों व ग्रामीणों के वाहन हिचकोले खाते हुए गुजरते हैं, सड़क की हालत इतनी खराब व उबड़ खाबड़ है कि हर समय दुर्घटना होने की संभावना बनी रहती है।बनाल, ठकराल व बड़कोट पट्टी के चार दर्जन से अधिक गांवों का मुख्य मार्ग होने के कारण यहाँ से बीमार व गर्भवती महिलाओं को सफर कराना भी जोखिम भरा है।आजकल बरसात के चलते इस लावारिस समझे जाने वाले मोटरमार्ग पर जगह जगह दीवारें टूटी हुई है, जहां तहां सड़क पर गहरे गहरे गड्ढे पड़े हुए हैं जिससे वाहनों का संचालन करना इस सड़क पर जान जोखिम में डालना है।सबसे बड़ी बात यह है कि यह मोटरमार्ग लोकनिर्माण विभाग के डिवीजन कार्यालय से मात्र एक किलोमीटर की दूरी पर है, लेकिन मजाल है कि विभाग का कोई अधिकारी इस मोटरमार्ग की सुध लेकर इसकी हालत सुधार कर इसका डामरीकरण करने को प्रयास करे।
बनाल, ठकराल व बड़कोट पट्टी के ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र ही इस मोटरमार्ग की जीर्ण शीर्ण हालत ठीक कर डामरीकरण नहीं किया जाता है तो ग्रामीण सम्बन्धित विभाग के विरुद्ध आंदोलन करने को बाध्य होंगे।विदित रहे कि उक्त मोटरमार्ग पर तीन सड़क दुर्घटनाओं में अभी तक दो लोग अपनी जान गवां चुके हैं।

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