सुनील थपलियाल उत्तरक़ाशी
समय चाहे कितना ही क्यों न बदल जाए, लेकिन इंसान कभी अपनी मातृभाषा और स्थानीय खाद्य पदार्थों का स्वाद नहीं भूल सकता। यही कारण है कि उत्तराखंड में चाइनीज, इटेलियन और फास्ट फूड से कई गुना ज्यादा पहाड़ी व्यंजन पसंद किए जा रहे हैं। रवांई की रसोई ने पुरोला के मेले में धूम मचाई हुई है , हर मेलार्थी रवांई के पकवानों का स्वाद लेता थक नही रहा है ।
रवांई की रसोई में मंडुवा की रोटी, कुलथ की दाल, कद्दू का रायता, तिल की चटनी, लाल चावल का भात, कंडाली का साग,डिन्डगे,पकोड़े,बडील, सीडे,,झंगोरे की खीर खूब मिल रही है । इन दिनों ये पहाड़ी व्यजंन लोगों की खास पसंद बने हुए हैं। इसके अलावा लाल चावल के भात,डिन्डगे की बात करें, तो झंगोरे की खीर का स्वाद सुनते ही लोगों के मुंह में पानी आ जाता है।
रवांई की रसोई में मंडुवा की रोटी, कुलथ की दाल, कद्दू का रायता, तिल की चटनी, लाल चावल का भात, कंडाली का साग,डिन्डगे,पकोड़े,बडील, सीडे,,झंगोरे की खीर खूब मिल रही है । इन दिनों ये पहाड़ी व्यजंन लोगों की खास पसंद बने हुए हैं। इसके अलावा लाल चावल के भात,डिन्डगे की बात करें, तो झंगोरे की खीर का स्वाद सुनते ही लोगों के मुंह में पानी आ जाता है।रवांई की रसोई में बनने वाले व्यंजनों की मांग अब बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों के साथ ही अन्य राज्यों से आने वाले पर्यटक भी यहां पहाड़ी व्यंजन का स्वाद लेना नहीं भूलते और सबसे खास बात यह है कि अगर आपने एक बार पहाड़ी व्यंजन को चख लिया, तो दोबारा यहां आने पर इसकी मांग किए बगैर नहीं रह पाएंगे। 

नगर पंचायत पुरोला के अध्यक्ष हरिमोहन नेगी ने रवांई की रसोई की संचालक जमुना रावत को 11 हजार का चेक ,स्मृति चिन्ह और शॉल भेंट कर सम्मानित भी किया । इस दौरान जमुना रावत बेहद खुश नजर आयी और सहयोग के लिए आभार जताया।
टीम यमुनोत्री Express

