बड़कोट। रवांई क्षेत्र की लोक संस्कृति और लोकगीतों को संरक्षित करने की दिशा में ग्राम सभा सरनौल में एक महत्वपूर्ण आयोजन संपन्न हुआ। शिक्षक एवं साहित्यकार ध्यान सिंह रावत द्वारा रचित पुस्तक ‘रवांई की लोक गीत’ का लोकार्पण राजकीय इंटर कॉलेज सरनौल के सभागार में आयोजित एक गरिमामय समारोह के दौरान किया गया। कार्यक्रम के साथ लोक संस्कृति संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्र के साहित्यकारों, शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं अतिथियों के स्वागत के साथ पुस्तक के सहयोगियों को सम्मानित कर हुआ। इसके पश्चात पुस्तक का विधिवत विमोचन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि रवांई क्षेत्र की लोक परंपराएं, लोकगीत और सांस्कृतिक धरोहरें आज भी समाज की पहचान हैं, जिन्हें संरक्षित और प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी।
मुख्य अतिथि पूर्व विधायक केदार सिंह रावत ने लेखक को बधाई देते हुए कहा कि लोक साहित्य किसी भी समाज की आत्मा और उसकी सांस्कृतिक पहचान का आधार होता है। ऐसे साहित्यिक प्रयास न केवल संस्कृति को संजोते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से परिचित कराने का कार्य भी करते हैं।
प्रख्यात साहित्यकार महावीर रवांल्टा ने रवांई क्षेत्र के लोकगीतों की ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लोकगीत हमारे पूर्वजों की स्मृतियों और जीवन मूल्यों के जीवंत दस्तावेज हैं। वहीं साहित्यकार एवं कवित्री भारती आनंद ने पुस्तक की समीक्षा प्रस्तुत करते हुए इसके विभिन्न पक्षों पर विस्तार से चर्चा की और इसे लोक साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान बताया।
संगोष्ठी में प्रो. आर.एस. असवाल, कुलवंती असवाल, प्रवीण भट्ट, क्षेत्र पंचायत सदस्य मनोज सेमवाल, प्रधान बलेन्द्र रावत सहित अनेक वक्ताओं ने लोक संस्कृति के संरक्षण, लोकगीतों के दस्तावेजीकरण तथा युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
इस अवसर पर जबर सिंह, सरदार सिंह, अनिल बेसारी, हरदेव रावत, भगत सिंह तरवीन राणा, प्रवीन असवाल, जगमोहन राणा, बलदेव, सुरवीर, भरत सिंह, जोगेंद्र सिंह, बलबीर सिंह, वीरेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन रवांई की समृद्ध लोक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने इस आयोजन को क्षेत्र की सांस्कृतिक चेतना को सशक्त बनाने और लोक साहित्य को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक सराहनीय पहल बताया।

