बड़कोट(उत्तरकाशी)।
जनपद उत्तरकाशी के बड़कोट क्षेत्र से एक सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की पेंशन लंबित होने का मामला सामने आया है, जिसने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम कोटी (ठकराल) निवासी बलदेव सिंह रावत ने मुख्यमंत्री को प्रार्थना पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।
बताया गया कि बलदेव सिंह रावत वर्ष 1989 में राजस्व विभाग में संग्रह अनुसेवक के पद पर चयनित हुए थे। लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद उनका नियमितीकरण नहीं किया गया और वर्षों तक उन्हें दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्य करना पड़ा। 1998 में नियमित कर्मी के रूप में कार्य करते हुए वर्ष 2022 में सेवानिवृत्त हुए।
सेवानिवृत्त कर्मी का आरोप है कि शासनादेशों और उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद विभागीय अधिकारियों ने आदेशों का सही अनुपालन नहीं किया। जहां अन्य कर्मचारियों को सेवा लाभ और पेंशन का लाभ मिल गया, वहीं उन्हें इससे वंचित रखा गया।
श्री रावत 30 जून 2022 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन सेवानिवृत्ति के चार वर्ष बाद भी उनका पेंशन प्रकरण लंबित है। उन्होंने आशंका जताई कि विभागीय लापरवाही के कारण उन्हें अपने ही हक के लिए भटकना पड़ रहा है।
प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि राजस्व परिषद और संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमों की अनदेखी कर कुछ कर्मचारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया, जबकि पात्र कर्मचारियों को नजरअंदाज किया गया। साथ ही, गलत निर्णयों के कारण सरकारी खजाने पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त भार पड़ने की भी बात कही गई है।
पीड़ित कर्मचारी ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और उन्हें नियमानुसार सेवा लाभ देते हुए पेंशन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि शासनादेशों के बावजूद जमीनी स्तर पर लापरवाही किस तरह आम कर्मचारियों के जीवन को प्रभावित कर रही है। अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।
इस पूरे मामले में जिलाधिकारी उत्तरकाशी प्रशांत आर्य का कहना है कि “उक्त प्रकरण अभी संज्ञान में नहीं है। मामले की जांच करवाई जाएगी, ताकि पेंशन से संबंधित लंबित प्रकरण का शीघ्र निस्तारण हो सके।”

