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देहरादून में आरटीआई से खुलासा ! न्यायालय में दावे कुछ और, सरकारी रजिस्टर में हाजिरी कहीं और — क्या प्रशासन लेगा संज्ञान?….

ब्यूरो
देहरादून।
भारतीय रेडक्रॉस सोसाइटी की उत्तराखंड राज्य शाखा से जुड़े विवाद ने अब नया और गंभीर मोड़ ले लिया है। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत प्राप्त आधिकारिक अभिलेखों ने ऐसे तथ्य उजागर किए हैं, जिन्होंने न्यायालय में प्रस्तुत दावों और सरकारी रिकॉर्ड के बीच सीधे टकराव की स्थिति पैदा कर दी है।
आरटीआई के जरिए सामने आए दस्तावेजों में न्यायालय में दिए गए विवरण और सरकारी उपस्थिति पंजिका में दर्ज तथ्यों के बीच तिथिवार अंतर दर्ज पाया गया है, जिससे पूरे मामले पर सवालों की बौछार शुरू हो गई है।
न्यायालयीन दावे बनाम सरकारी रिकॉर्ड
प्राप्त अभिलेखों के अनुसार, ऋषिकुल आयुर्वेद महाविद्यालय, हरिद्वार द्वारा उपलब्ध कराई गई सत्यापित उपस्थिति पंजिका और माननीय उपजिलाधिकारी सदर न्यायालय, देहरादून में प्रस्तुत तथ्यों के बीच स्पष्ट विसंगति सामने आई है।
डॉ. नरेश चौधरी, जो ऋषिकुल आयुर्वेद महाविद्यालय में प्रोफेसर पद पर कार्यरत हैं तथा रेडक्रॉस सोसायटी राज्य शाखा के चेयरमैन रह चुके हैं, ने न्यायालय में विभिन्न तिथियों पर देहरादून स्थित राज्य शाखा कार्यालय में उपस्थिति, बैठकों की अध्यक्षता, प्रशासनिक निर्णय, नियुक्ति/पदमुक्ति, प्राथमिकी दर्ज कराने और अन्य महत्वपूर्ण कार्यवाहियों में संलग्न रहने का उल्लेख किया है।

लेकिन आरटीआई से प्राप्त सरकारी उपस्थिति रजिस्टर कुछ और कहानी बयान करता है।
इन तिथियों पर कॉलेज में दर्ज है उपस्थिति
लोक सूचना अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराए गए सत्यापित अभिलेखों के अनुसार निम्न तिथियों पर डॉ. चौधरी की उपस्थिति ऋषिकुल आयुर्वेद महाविद्यालय, हरिद्वार में दर्ज है—
28 अगस्त 2025
10 सितंबर 2025
11 सितंबर 2025
12 सितंबर 2025
18 सितंबर 2025
20 सितंबर 2025
30 सितंबर 2025
03 अक्टूबर 2025
30 अक्टूबर 2025
26 नवंबर 2025
12 दिसंबर 2025
13 दिसंबर 2025
16 दिसंबर 2025
इनमें से कई तिथियां वही हैं, जिन पर न्यायालय में प्रस्तुत विवरण के अनुसार वे देहरादून स्थित राज्य शाखा कार्यालय अथवा प्रशासनिक बैठकों में सक्रिय बताए गए हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि एक ही तिथि पर दो स्थानों पर उपस्थिति कैसे संभव हुई?
-अनुमति नियमों पर भी उठे सवाल
आरटीआई के जवाब में यह भी स्पष्ट रूप से दर्ज है—
“किसी भी कर्मचारी को परिसर से बाहर अन्य कार्य हेतु जाने से पूर्व संस्थान प्रमुख/परिसर निदेशक से अनुमति लेना अनिवार्य है।”
उपलब्ध रिकॉर्ड में उपरोक्त तिथियों के संबंध में किसी पूर्व अनुमति का उल्लेख नहीं पाया गया है। यदि अनुमति ली गई थी तो उसका रिकॉर्ड कहां है? और यदि नहीं ली गई तो क्या यह सेवा नियमों का उल्लंघन माना जाएगा?
-विवाद की पृष्ठभूमि और गंभीरता
यह मामला उस अवधि से जुड़ा है जब रेडक्रॉस राज्य शाखा में प्रबंधन विवाद, धारा 164(1)/165 के तहत सीलिंग कार्यवाही, बैठकों की वैधता और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर तीखी कानूनी खींचतान चल रही थी।
ऐसे संवेदनशील समय में उपस्थिति से जुड़े आधिकारिक दस्तावेजों का सार्वजनिक होना पूरे प्रकरण को और अधिक गंभीर बना रहा है।
अब बड़ा सवाल — क्या प्रशासन लेगा संज्ञान?
तथ्य सामने हैं, दस्तावेज सार्वजनिक हैं, और तिथियां स्पष्ट हैं। अब निगाहें प्रशासन और संबंधित विभागों पर टिकी हैं। क्या इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच होगी? क्या अभिलेखों की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि कराई जाएगी?
जनचर्चा तेज है और पारदर्शिता की मांग भी। आने वाले दिनों में संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया और न्यायालय की कार्यवाही इस मामले की दिशा तय करेगी।

इधर परिसर निदेशक डॉ अनूप जी सम्पर्क करने का प्रयास किया लेकिन सम्पर्क नही हो पाया जबकि सूचना का अधिकार के तहत सूचना इन्ही के कार्यालय से मिली है।

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