उत्तरकाशी।
नौगाँव (उत्तरकाशी) में नगर पंचायत के कामकाज को लेकर सियासी और प्रशासनिक घमासान तेज हो गया है। बगैर बोर्ड बैठक की सहमति के कराए जा रहे कार्यों के विरोध में नगर पंचायत के छः सभासदों ने नगर पंचायत कार्यालय के बाहर दरी बिछाकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। नाराज सभासदों ने नगर पंचायत अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए इस्तीफे की मांग की है।
धरने पर बैठे सभासदों का आरोप है कि नगर पंचायत अध्यक्ष द्वारा मनमाने तरीके से धन की बंदरबांट की जा रही है और रिश्तेदारों व चहेतों को अनुचित लाभ पहुंचाया जा रहा है। सभासदों का कहना है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक उनका धरना जारी रहेगा।
सभासदों ने यह भी आरोप लगाया कि बोर्ड बैठक में पारित प्रस्तावों से छेड़छाड़ की जा रही है। कई कार्य ऐसे हैं जिनकी जानकारी तक सभासदों को नहीं दी जाती, जबकि सभासदों की सहमति के बिना ही प्रस्ताव रजिस्टर में कार्य दर्ज कर दिए जाते हैं, जिससे उनकी छवि धूमिल हो रही है। उनका कहना है कि “कहां क्या काम हो रहा है, इसकी जानकारी न होने से जनता के बीच गलत संदेश जा रहा है।”
धरने की सूचना मिलते ही नगर पंचायत अध्यक्ष ने मौके पर पहुंचकर सभासदों को मनाने की कोशिश की, लेकिन सभासद धरने से उठने को तैयार नहीं हुए। धरने में शामिल सभासदों में कृष्ण मोहन रमोला, ललित परमार, सुनीता असवाल, रोहित रावत, लता नौटियाल और सुनील कोहली शामिल रहे।
वहीं, नगर पंचायत अध्यक्ष विजय कुमार ने सभासदों द्वारा लगाए गए आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा सभी कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ कराए जा रहे हैं। अध्यक्ष का कहना है कि यह आपसी पारिवारिक मामला है, जिसे बैठकर सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने धरने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे पूरी नगर पंचायत की छवि खराब होगी और विकास कार्य प्रभावित होंगे।
इस मामले पर नगर पंचायत नौगाँव की अधिशासी अधिकारी शिवानी रावत ने स्पष्ट किया कि उनके द्वारा केवल उन्हीं कार्यों के कार्यादेश जारी किए गए हैं जो बोर्ड बैठक में प्रस्तावित थे। जिस निर्माण कार्य को लेकर विवाद खड़ा हुआ है, उसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है कि किसके कहने पर निर्माण कार्य शुरू हुआ।
फिलहाल, नगर पंचायत नौगाँव में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और प्रशासन की नजर पूरे घटनाक्रम पर टिकी हुई है। अब देखना यह होगा कि यह मामला जांच और आपसी बातचीत से सुलझता है या धरना और उग्र रूप लेता है।

