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पहाड़ों में हो रही सड़क दुर्घटनाओं को लेकर चिंतित व व्यथित हैं डॉ. के.पी.जोशी,मुख्यमंत्री को लिखा सुझाव भरा पत्र,आप भी पढ़े…..

देहरादूनब्यूरो

सड़क दुर्घटनाओ को रोकने हेतु गम्भीर व आवश्यक कदम उठाने के लिए चार धाम अस्पताल के संस्थापक डॉ. के. पी. जोशी ने पुष्कर सिंह धामी मा. मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड सरकार को पत्र लिखा है जिसमें उन्होंने बेहतर उपाय सरकार को सुझाये है।उन्होंने पत्र के माध्यम से कहा कि मुख्यमंत्री जी आप भी हमारी तरह पहाड़ों में हो रही सड़क दुर्घटनाओं को लेकर चिंतित व व्यथित होंगे कई परिवार असमय ही काल के गाल में समा रहे हैं जिससे सामाजिक, आर्थिक व सरकारी मशीनरी पर बोझ पड़ रहा है। इन दुर्घटनाओं
को रोकने हेतु कुछ ठोस सुझाव आपके सामने प्रस्तुत है। जिसमें पहाड़ों की सड़कों पर अनिवार्य रूप से सुरक्षा की दृष्टि से बाउंड्री वॉल व जाल बनाए जाएं, ड्राइवरों का अनिवार्य रूप से मेडिकल जांच जिसमें आंखों की व शारीरिक क्षमता की जांच पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।, ड्राइवरों के काम करने के घंटे निर्धारित हो तथा साथ ही चार धाम यात्रा में रिजर्व डे अनिवार्य हो तथा दूसरी यात्रा शुरू करने से पहले 48 घंटे (2 दिन) का विश्राम व आराम दिया जाए। यात्रा समय में नशा करने पर तुरंत हटाने व गाड़ी के ड्राइवर के लाइसेंस को कैंसिल किया जाए और यात्रियों के साथ अच्छा व्यवहार प्रशिक्षण में शामिल हो,  गाड़ियों की नियमित तौर पर चेकिंग व फिटनेस देखी जाय, अनफिट गाड़ी व अनफिट चालक पाए जाने पर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी निश्चित की जाए। , सड़कों की स्थिति सुधारने व सड़क के फिट रखने की जिम्मेदारी निर्धारित की जाए, सड़क परिवहन अधिकारी, पुलिस की जिम्मेदारी निश्चित हो , स्थानीय प्रशासन, सड़क परिवहन अधिकारी, पुलिस, स्थानीय लोग मुख्य भूमिका में रहे। , यात्रा रूट पर पड़ रहे स्थानीय गांव के निवासियों को सुरक्षित यात्रा संबंध में शामिल किया जाए प्रत्येक गांव के बेरोजगार युवकों को न्यूनतम धन राशि पर निश्चित दूरी के लिए लगाया जा सकता है।,एन डी आर एफ,एस डीआरएफ, पुलिस, स्थानीय गांव के लोगों की निर्धारित रूट व उनकी सीमा बांध दी जाए।, एनसीसी के कैडेटो से समय समय पर मदद ली जाए यानी प्रत्येक 5 किलोमीटर की दूरी पर एस डी आरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय युवकों का एक समन्वय हो । उन्होंने लिखा है कि रात्रि ड्राइविंग विशेष परिस्थितियों में सुरक्षा प्रबंध के साथ ही ग्रामीण इलाकों में निर्धारित की जाए, उत्तराखंड को दुर्घटना मुक्त बनाना हमारा उद्देश्य है व आप इस उद्देश्य की अगुवाई करने का कष्ट करें इस गंभीर विषय पर सड़क स्वास्थ्य विभाग, एनडीआरएफ, प्रशासन व स्थानीय लोगों के लिए एक सेमिनार अपेक्षित है। जिसमें सभी के विचारों को शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि 5 जून को यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुई बस दुर्घटना  में 27 की मौत के समय प्रशासन व पुलिस का रेस्क्यू यानी क्यूक रिस्पॉन्स में घायलों को अस्पताल पहुँचाना व देर रात्रि तक मौके पर मृत हुए श्रद्धालुओं के शवों की रिकब्वर किया जाना प्रशंसनीय है। उम्मीद है आप इन सुझाव पर विचार करते हुए राज्य के भीतर क्रियान्वयन करेंगे।

टीम यमुनोत्री Express

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