बड़कोट/उत्तरकाशी। उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ, शाखा नौगांव ने शुक्रवार को अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री के नाम एक ज्ञापन उप जिलाधिकारी बड़कोट के माध्यम से प्रेषित किया। ज्ञापन में आरटीई अधिनियम, 2009 लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से स्थायी छूट देने तथा पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों का चयन उस समय राज्य सरकार एवं एनसीटीई द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ था। ऐसे में उनकी सेवा और पदोन्नति के लिए टीईटी की अनिवार्यता न्यायसंगत नहीं है। इसलिए अधिनियम में आवश्यक संशोधन कर उन्हें टीईटी से मुक्त किया जाना चाहिए।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि नई पेंशन योजना (एनपीएस) के स्थान पर पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल की जाए, ताकि शिक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित हो सके। संघ का कहना है कि पुरानी पेंशन कर्मचारियों को बुढ़ापे में आर्थिक एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है।
शिक्षक संघ ने प्रधानमंत्री एवं केंद्रीय शिक्षा मंत्री से मांग की कि आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त की जाए तथा पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने के लिए आवश्यक निर्णय लिया जाए। इससे शिक्षक पूरी निष्ठा एवं मनोयोग से अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगे।
इस अवसर पर उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ, शाखा नौगांव के अध्यक्ष विजेन्द्र विश्वकर्मा, कोषाध्यक्ष श्रीमती पूनम सगोला तथा मंत्री प्रताप सिंह राणा सहित दर्जनों शिक्षको ने ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर अपनी मांगों को शीघ्र पूरा करने की अपील की। ज्ञापन उप जिलाधिकारी बड़कोट, उत्तरकाशी के माध्यम से भारत सरकार व शिक्षा मंत्री को भेजा गया।

