सर्पदंश से महिला की दर्दनाक मौत, बलाड़ी गांव में पसरा मातम
टमाटर के खेत में निराई करते समय सांप ने डसा, अस्पताल में तोड़ा दम; छह माह पहले ही होमगार्ड पति का हुआ था निधन
बड़कोट/नौगांव (उत्तरकाशी)। नौगांव विकासखंड के बलाड़ी गांव में सर्पदंश की एक दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया। खेत में काम कर रही 58 वर्षीय महिला की जहरीले सांप के काटने से मौत हो गई। इस हादसे से गांव में मातम पसरा हुआ है, जबकि पहले से ही विपत्तियों का सामना कर रहा परिवार एक और गहरे सदमे में डूब गया है।
जानकारी के अनुसार, सुगंधरा देवी (58 वर्ष), पत्नी स्वर्गीय भरत सिंह, मंगलवार को अपने टमाटर के खेत में निराई-गुड़ाई का कार्य कर रही थीं। इसी दौरान खेत में छिपे एक जहरीले सांप ने अचानक उनके हाथ पर डंस लिया। परिजनों ने बिना समय गंवाए उन्हें उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, नौगांव ले गए, लेकिन उनकी हालत बिगड़ गई और उन्होंने दम तोड़ दिया।
मृतका अपने पीछे चार बच्चों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। परिवार में दो बेटे और दो बेटियां हैं। दोनों बेटों तथा एक बेटी का विवाह हो चुका है, जबकि एक बेटी अभी अविवाहित है। इस दुखद घटना से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
ग्रामीणों ने बताया कि मृतका के पति भरत सिंह, जो होमगार्ड में तैनात थे, उनका भी लगभग छह माह पूर्व हृदयगति रुकने से निधन हो गया था। पति की मौत के बाद किसी तरह परिवार संभलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अब सुगंधरा देवी के असामयिक निधन ने पूरे परिवार को बेसहारा कर दिया है।
घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। जिला पंचायत सदस्य विजय बंधानी, पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष जगदीश असवाल , पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य सोबन असवाल,ग्राम प्रधान व क्षेत्र पंचायत सदस्य सहित कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर शोक संवेदना व्यक्त की। उन्होंने प्रशासन से पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता एवं हर संभव सरकारी मदद उपलब्ध कराने की मांग की।
ग्रामीणों ने भी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि पर्वतीय क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों में सर्पदंश के उपचार के लिए पर्याप्त मात्रा में एंटी-स्नेक वेनम, आवश्यक दवाइयां तथा आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं में समय पर उपचार देकर लोगों की जान बचाई जा सके। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं, इसलिए स्वास्थ्य विभाग को पहले से ही विशेष तैयारी करनी चाहिए।

