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आस्था ।यमुना संरक्षण का महाअभियान पूरा: 756 दिनों तक चली 108 कथाओं का ऐतिहासिक समापन, खरशाली में पंचमुखी हनुमान स्थापना बनी आस्था का प्रतीक

यमुना संरक्षण का महाअभियान पूरा: 756 दिनों तक चली 108 कथाओं का ऐतिहासिक समापन, खरशाली में पंचमुखी हनुमान स्थापना बनी आस्था का प्रतीक

बड़कोट (उत्तरकाशी):
यमुना नदी की अविरलता, निर्मलता और संरक्षण को समर्पित एक ऐतिहासिक धार्मिक-अभियान ने अब पूर्णता का स्वर्णिम अध्याय लिख दिया है। यमुनोत्री उद्गम स्थल से लेकर प्रयागराज तक चलाए गए महन्त प्रकाशानंद महाराज के 108 श्रीमद्भागवत कथा संकल्प का विधिवत समापन यमुनोत्री धाम के समीप स्थित खरशाली गांव में भव्य आयोजन के साथ सम्पन्न हुआ।

करीब 756 दिनों तक लगातार चले इस 108 कथाओं का महाअभियान ने न केवल धार्मिक चेतना जगाई, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जन-जन को जागरूक करने का कार्य किया। मंगलवार को आयोजित 108वीं और अंतिम कथा में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में डूब गया।

कथा के समापन अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार, हवन-पूजन और विधि-विधान के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। कथा व्यास महन्त प्रकाशानंद महाराज ने इस क्षण को अत्यंत भावुक और गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि माँ यमुना के प्रति समर्पित यह संकल्प केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण का एक जनआंदोलन है।

उन्होंने कहा कि “केवल सरकार के भरोसे न रहकर प्रत्येक व्यक्ति को नदियों की स्वच्छता और अविरलता के लिए स्वयं आगे आना होगा। आस्था तभी सार्थक है, जब हम अपनी नदियों को स्वच्छ रखने का संकल्प निभाएं।”

उन्होंने यमुनोत्री धाम आने वाले श्रद्धालुओं से विशेष अपील की कि यात्रा के दौरान यमुना नदी में किसी भी प्रकार की गंदगी न फैलाएं और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।

अंतिम कथा में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। धार्मिक आस्था और पर्यावरण जागरूकता का यह अद्भुत संगम पूरे कार्यक्रम की विशेष पहचान बना।

इस महाअभियान की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में खरशाली में पंचमुखी हनुमान जी की भव्य मूर्ति की स्थापना भी की गई। यह मूर्ति आने वाले समय में श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगी, साथ ही यमुना संरक्षण के इस संकल्प की जीवंत प्रतीक के रूप में स्थापित रहेगी।

कार्यक्रम में शास्त्री मायाराम शर्मा, अशोक शर्मा, उदय प्रकाश मिश्रा, गणेश डिमरी सहित अनेक गणमान्य लोगों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इसके अलावा विकास वालिया, रविंद्र कुमार, राकेश कुमार कश्यप, रवि यादव, अतुल राय, जीतपाल शर्मा, राकेश जयदेव, अनिल शर्मा, मोहन अग्रवाल, अरविंद बंसल, प्रवीण गुप्ता, निखिल सावड़ा, नीलम अग्रवाल, नीता गुप्ता, कामना गुप्ता, संस्कार वालिया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

साथ ही महादेव प्रसाद उनियाल, विपिन प्रसाद, राजेश उनियाल, राकेश रावत, प्रदीप रावत, यशपाल राणा, रणजीत राणा, मोहन प्रसाद उनियाल समेत क्षेत्र के कई गणमान्य नागरिकों ने भी अपनी सहभागिता दर्ज कराई।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों में क्षेत्र पंचायत सदस्य रंजीता राणा एवं ग्राम प्रधान नीतू उनियाल की सक्रिय भूमिका भी सराहनीय रही।

इस ऐतिहासिक आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब आस्था और जागरूकता साथ चलती है, तब समाज में बड़ा परिवर्तन संभव होता है। यमुना संरक्षण का यह संकल्प आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

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