Hindi news (हिंदी समाचार) , watch live tv coverages, Latest Khabar, Breaking news in Hindi of India, World, Sports, business, film and Entertainment.
एक्सक्लूसिव देहरादून बड़ी खबर राज्य उत्तराखंड स्वास्थ्य

उत्तराखंड के 25 साल: दुरस्त गांव आज भी सिस्टम से बाहर, सीनियर फिजिशियन डॉ. के. पी. जोशी की पीड़ा, स्वास्थ्य व परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल,बातचीत को पढ़े पूरी खबर में…..

सुनील थपलियाल से हुई बातचीत में
उत्तराखंड राज्य गठन को 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन पहाड़ के दुरस्त जिलों और गांवों से आने वाले लोगों की समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं। चारधाम अस्पताल के संस्थापक सीनियर फिजिशियन डॉ. के. पी. जोशी ने राज्य की मौजूदा स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि इतने वर्षों बाद भी आम लोगों के दुख-दर्द का कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
डॉ. जोशी के अनुसार, आज भी दूरस्थ गांवों से राजधानी या जिला मुख्यालय आने वाले लोगों को अपने छोटे-छोटे कामों के लिए अत्यधिक धक्के खाने पड़ते हैं। ऐसी कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं बन पाई है, जिससे बिना भटके और समय गंवाए उनका काम हो सके। प्रशासनिक प्रक्रिया एक ओर अधूरी है, तो दूसरी ओर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और भी चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि आज तक ऐसा कोई सुदृढ़ सिस्टम विकसित नहीं हो पाया है, जिसके तहत बीमार व्यक्ति को गांव से जिला मुख्यालय या गंभीर मरीज को मेडिकल कॉलेज अथवा उच्च चिकित्सा संस्थान तक समय पर और सुरक्षित तरीके से पहुंचाया जा सके। पहाड़ी क्षेत्रों में दुर्घटनाएं अधिक होती हैं और कई बार गंभीर मरीजों के मामलों में सही निर्णय लेना बेहद कठिन हो जाता है।
डॉ. जोशी ने ज़ोर देते हुए कहा कि उत्तराखंड को एक मजबूत और एकीकृत ट्रांसपोर्ट सिस्टम की जरूरत है, जो गांव से लेकर टर्शरी केयर यानी उच्च चिकित्सा केंद्र तक जुड़ा हो। इसके साथ ही बड़े अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में 24 घंटे सक्रिय रहने वाला एक विशेष सेल होना चाहिए, जो आपातकाल में पहाड़ से आए अनजान मरीजों और उनके परिजनों को तुरंत अटेंड करे, सही विभाग और डॉक्टर तक पहुंचाए, जांच, दवाइयों, ऑपरेशन और अन्य जरूरी मदद को सुचारु रूप से सुनिश्चित करे।
उन्होंने यह भी कहा कि पहाड़ के दूरस्थ इलाकों के लोग सीधे-साधे और व्यवस्थाओं से अनजान होते हैं। कई बार मृत्यु की स्थिति में पोस्टमार्टम या मेडिको-लीगल प्रक्रियाओं का उन्हें कोई अनुभव नहीं होता, जिससे उनका मानसिक और शारीरिक कष्ट और बढ़ जाता है।
डॉ. के. पी. जोशी ने भावुक होते हुए कहा,
“मेरा सपना रहा है कि दुर्गम और जटिल परिस्थितियों में रहने वाले लोगों के लिए ऐसा सिस्टम हो, जो उन्हें घर से लेकर इलाज के बाद सुरक्षित वापस घर पहुंचाने तक जिम्मेदारी निभाए। मैं पिछले 22 वर्षों से अपने इस सपने को साकार करने में लगा हूं।”
उनकी यह पीड़ा न सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था, बल्कि राज्य के समग्र विकास मॉडल पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है, जो 25 साल बाद भी पहाड़ के अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाया है।

टीम यमुनोत्री Express

Related posts

उत्तरकाशी:त्यौहारी सीजन के दौरान देर शाम पुलिस कप्तान स्वयं निकले चैकिंग पर

admin

रविवार को प्रदेश भर से आये कोरोना संक्रमण के 1413 नए मामलेे……..

admin

उत्तरकाशी :भटवाड़ी में विजय दशमी से होगा रामलीला का आयोजन, समिती का हुआ गठन

Jp Bahuguna

You cannot copy content of this page