बड़कोट /उत्तरकाशी ।जनपद उत्तरकाशी के रवांई घाटी में मंगसीर बग्वाल के पर्व के दिन घाटी के गैर बनाल क्षेत्र में राजा रघुनाथ मंदिर प्रांगण में देश की सबसे लम्बी मशाल साठी और पानसाई थोक के सानिध्य में जलाई गयी।
बतादें कि रवांई घाटी में यह देवलांग की परपंरा सदियों पुरानी है और यह परपंरा लोक संस्कृति और तांदी नृत्य व जुमलों सहित विभिन्न विधाओं के रूप में मनाई जाने वाली लोक संस्कृति है जो आज उत्तरकाशी जिले के रवांई घाटी में अभी हमारी संस्कृति जिंदा है।
बतादें रवांई घाटी का देवलांग मेला प्रसिद्ध मेला और और एक लम्बे देवदार वृक्ष को खड़ा किया जाता है और साठी पानसाई थोक उस पर आग लगाकर जलातें और राजा रघुनाथ की गाथा को गातें हैं।
रवांई घाटी का देवलांग मेला यमुना घाटी के बनाल क्षेत्र के लगभग 70गांव का यह पौराणिक मेला और यह मेला राजकीय मेला घोषित है लेकिन इस पौराणिक सांस्कृति मेलें में उत्तराखंड सरकार का कोई प्रतिनिधि नहीं पंहुचा जिससे लोगों ने नाराजगी जरूर व्यक्त किया लेकिन लोगों के भीतर अपनी पौराणिक संस्कृति के प्रति उत्साह जरूर था।
कार्यक्रम में गैर बनाल क्षेत्र से प्रदीप गैरोला,सुखदेव रावत,महिदर गैरोला,किताब सिहं रावत,चैन सिंह चौहान, बलवंत सिंह, शिवप्रसाद गौड़, दरमियान गौड़,विशावमणी बडोनी,पवन पंवार जिला पंचायत सदस्य,राधेश्याम नौटियाल,सोबेद्र राणा,अमीन सिहं चौहान, यशवंत चौहान सहित साठी पानसाई थोक के सेकडो लोग व दूर दराज क्षेत्रों से पंहुचे सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।

