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उत्तरकाशी एक्सक्लूसिव बड़ी खबर राज्य उत्तराखंड

धामी सरकार की छवि को खराब करने में जुटा एक विभाग ,जनता के जीवन से खिलवाड़ जारी, जीरो टॉलरेन्स पर खड़े हुए सवाल ,पढ़े छवि खराब करने वाले विभाग की कहानी……..

सुनील थपलियाल उत्तरकाशी। 

यमुनाघाटी में गुणवत्ताविहीन चावल परोस कर गरीबों के जीवन के साथ हो रहा खिलवाड़ थमने का नाम नहीं ले रहा है। खासकर यमुना घाटी के लोगों के साथ हो रहा भेदभाव कई सवाल खड़े कर रहा है। यहाँ सरकार का न तो जीरो टॉलरेन्स लागू होता है न सुधार की दूर दूर तक गुंजाईश ही दिखती है।
आखिर यमुना घाटी के लोगों को क्यों विभाग दोयम दर्जे का नागरिक मानती है, यह बात खाद्यान्न आपूर्ति में लगातार हो रही बेईमानी और सरकार में बैठे लोगों का आँख मूंद कर रहना बहुत कुछ साफ कर देता है। इस बात का प्रमाण यह है कि
वरिष्ठ विपणन अधिकारी व प्रबन्धक भारतीय खाद्य निगम की मिलीभगत से यमुनाघाटी में धड़ल्ले से बिना टेग लगे व कटे फ़टे चावल के कट्टे भेजने का सिलसिला जारी है। उत्तरकाशी से तैनात क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी के साथ तक उक्त अधिकारी दुर्व्यवहार कर अपनी मनमानी करने में बाज़ नहीं आए हैं।
इधर मार्च माह में हुई घटिया चावलों की सैम्पलिंग की रिपोर्ट न आने और दोषियों पर कार्यवाही न होने से यमुनाघाटी की जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है।
मालूम हो कि यमुना घाटी में लंबे समय से घटिया चावलों का वितरण कर गरीब जनता के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था। 22 मार्च को जय हो ग्रुप की शिकायत पर स्थानीय प्रशासन ने बेस गोदाम विकासनगर से बड़कोट पहुँचे चार ट्रकों से आये घटिया चावलों की खेप पकड़ी थी। 23 मार्च को प्रशासन, खाद्य व आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने बाकायदा घटिया चावलों की सैम्पलिंग करवाई लेकिन एक महीने बीतने के बाद भी उक्त सैम्पलिंग की रिपोर्ट सार्वजनिक नही की गई है। इससे साफ हो गया है कि दाल में काला नहीं बल्कि पूरी दाल ही काली है और सरकार में बैठे जिम्मेदार लोग मौन साधे बैठे हैं।
निष्कर्ष यह कि गोरखधन्धा रोकने की कोई कोशिश नहीं हो रही है जबकि दावा करप्शन फ्री व्यवस्था का किया जा रहा है। लोग पूछने लगे हैं कि करप्शन फ्री व्यवस्था क्या यमुना घाटी छोड़ कर है या पूरे प्रदेश के लिए यह जुमला है। इस एक अकेले प्रकरण ने सरकार की कथनी और करनी दोनों को सवालों के घेरे में ला दिया है। बहुत संभव है अन्य मामलों में भी सिर्फ लीपापोती ही होती होगी, यह बात इस मामले से पुष्ट हो रही है। लोग पूछने लगे हैं कि सरकार की छवि खराब करने वाले विभाग पर कार्यवाही क्यो नही तो आखिर सरकार का इकबाल कहां खो गया है और हाथी के दिखने वाले दांतों से कब तक लोग आनंदित होते रहेंगे। सवाल बहुत सारे हैं लेकिन जवाब शून्य है। इस बीच इतना जरूर हुआ कि जिलाधिकारी और जिला पूर्ति अधिकारी उत्तरकाशी ने क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी की बेस गोदाम विकासनगर में तैनाती कर बेहतर खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित करवाने के निर्देश दिए लेकिन उनके साथ भी खाद्यान्न माफिया से सांठगांठ रखने वाले विपणन अधिकारी व निगम अधिकारी सहयोग की जगह उन्हें परेशान करने में जुटे हैं। वर्तमान में तैनात क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी मनोज सोनी से हुई दूरभाष पर पूछे प्रश्न पर पता चला कि अभी भी बिना टेग व कटे फ़टे चावल के कट्टे भेजे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बेस गोदाम में हालात ठीक नहीं हैं, उच्च अधिकारियों को मौखिक व पत्र के माध्यम से अवगत करवाया जा चुका है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि वरिष्ठ विपणन अधिकारी व प्रबन्धक भारतीय खाद्य निगम द्वारा अनेक प्रकार की परेशानियां उत्पन्न की जा रही हैं।
सोनी ने आला अफसरों को भेजे पत्र में खुलासा किया है कि बेस डिपो पर दैनिक रूप से जनपद उत्तरकाशी के वाहनों को जबरन कटे फटे कट्टे, बिना टैग व गुणवत्ता विहीन, अनस्वीपड कट्टों को लेबरो द्वारा बार बार अधोहस्ताक्षरी व वाहन चालकों द्वारा मना करने के उपरांत भी भरा जा रहा है। इस संबंध में वरिष्ठ विपणन अधिकारी व प्रबन्धक भारतीय खाद्य निगम को उनके द्वारा अवगत कराने पर यह कह कर मनमानी की जा रही है कि बारदाना ऐसा ही है। गुणवत्ता यही है, इसी को ले जाना है तो ले जाओ अन्यथा मना कर दो कि खाद्यान्न नहीं उठाना है।
सोनी के पत्र के मुताबिक सैम्पल हेतु दैनिक रूप में वरिष्ठ विपणन अधिकारी आना कानी कर रहे हैं। कभी दो तो कभी एक सैम्पल दिया जाता है और कभी सैम्पल ही नही दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनपद उत्तरकाशी के सुबह भेजे गये वाहनों को देर सांय जानकर भरवाया जा रहा है जिससे ज्यादातर वाहन खाली रहे है, जिससे वाहन चालक परेशान हो रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि वरिष्ठ विपणन अधिकारी द्वारा एक ओर पत्र लिख कर खाद्यान्नों के उठान का दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन वाहन उपलब्ध कराने पर वाहन भरे नहीं जा रहे हैं। लेबर से जबरन कटे फटे कट्टे बिना टैग, अनस्वीपड हाथ के सिले कट्टे डलवाये जा रहे हैं, नतीजतन दैनिक रूप में वाहन चालकों व श्रमिकों के बीच वाद-विवाद की स्थिति उत्पन्न हो रही है। उन्होंने बताया कि कांटे की पर्ची बिना हस्ताक्षर व अस्पष्ट दी जा रही है।
इधर सामाजिक चेतना की बुलन्द आवाज जय हो ग्रुप सहित यमुनाघाटी की जनता ने आक्रोश व्यक्त करते हुए बेस गोदाम विकासनगर से हटा कर अन्यत्र व्यवस्था करने सहित दोषियों पर कार्यवाही की मुख्यमंत्री से मांग की है। अगर जल्द दोषियों पर कार्यवाही न हुई तो जन आंदोलन की चेतावनी दी गयी है।

टीम यमुनोत्री Express

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