नैनबाग।
जौनसार के विसोई मंदिर से सात साल बाद महासू देवता की उत्सव डोली यमुना जल से स्नान करने को निकली तो सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु दर्शन को पहुँच गये। इसे जागड़ा पर्व कहते है। महासू देवता जौनसार, जौनपुर के सैकड़ो गाँव का इष्टदेव है।
जौनसार के खत बहलाड़ में ग्राम विसोई थान से आधा दर्जन गाँव से महासू देव की उत्सव डोली यमुना तट पर पहुँचने के दौरान निकलती है । इस बीच गाव गाँव के श्रद्धालुओं ने देवता के दर्शन कर मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद लिया। देवडोलो पर सोने का छत्र का घूमना मुख्य
आकर्षण का केंद्र रहा । ग्रामीणों ने हर गाँव मे देवडोली के दर्शन को पहुँचे श्रद्धालुओं के लिए भण्डारे यानी भोज की व्यवस्था की हुई थी। कहते है कि हर पाँच साल में महासू देवता की उत्सव डोली व मूर्ति यमुना नदी में स्नान करने को आती है , कोविड 19 के चलते इस बार उत्सव डोली 7 साल बाद यमुना तट पर पहुँची। देवडोलि के साथ सैकड़ो श्रद्धालुओं ने महासू देवता की जय हो का उदघोष चारो ओर गुजायमान हो उठा।
मन्दिर समिति के अध्यक्ष खुशीराम जोशी ने बताया कि महासू देव की उत्सव डोली हर 5 साल बाद यमुनातट पर स्नान करने को आती है ।क्षेत्र पंचायत सदस्य नरेश चौहान ने बताया कि देव डोली के दर्शन को दूर दूर से श्रद्धालुओं का जमाबड़ा लग जाता है और कोविड 19 कि बजह से दो वर्ष जागड़ा पर्व नही हो पाया इस बार सभी को महाराज के दर्शन हो गये।
टीम यमुनोत्री Express

