नैनबाग (टिहरी गढ़वाल) | रिपोर्ट: सुनील थपलियाल।इड्वालस्यु पट्टी के आराध्यदेव भगवान शेषनाग देवता की उत्सव डोली के भ्रमण कार्यक्रम के तहत ग्राम घियाकोटी में बुधवार को पूरी तरह भक्तिमय माहौल में सराबोर रहेगा। गांव में भगवान शेषनाग की भव्य झांकी और पारंपरिक मक्खन की होली का आयोजन किया जाएगा, जिसे देखने और देव दर्शन के लिए जौनपुर सहित दूर-दूर के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
मंगलवार 15 सितंबर की सायंकाल भगवान शेषनाग देवता की उत्सव डोली का घियाकोटी गांव में भव्य स्वागत किया गया। चारों ओर के ग्रामीण पारंपरिक मैला (जुलूस) की शक्ल में देवडोली के साथ गांव पहुंचे। ढोल-दमाऊं, रणसिंघा और लोक वाद्यों की मधुर धुनों के बीच पूरे गांव में जौनपुर की समृद्ध लोक संस्कृति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला।
बुधवार सुबह से भगवान शेषनाग की विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू होगा। श्रद्धालु देव प्रतिमाओं के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। दोपहर बाद भगवान शेषनाग की भव्य झांकी निकाली जाएगी, जिसके साथ पारंपरिक मक्खन की होली खेली जाएगी। यह आयोजन वर्षों से चली आ रही लोक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण माना जाता है।
गांव के स्याणा सूरत सिंह रावत और ग्राम सभा बामण गांव के प्रधान सुभाष रतूड़ी ने बताया कि भगवान नागदेवता की उत्सव डोली हर तीसरे वर्ष घियाकोटी गांव में आती है। पूरे गांव के लोग इसे महोत्सव के रूप में मनाते हैं और महीनों पहले से तैयारियां शुरू हो जाती हैं।
उन्होंने बताया कि स्थानीय वेशभूषा में सजी महिलाएं पारंपरिक तांदी नृत्य प्रस्तुत करती हैं, जबकि युवक पूरे उत्साह के साथ देवडोली के स्वागत और धार्मिक आयोजनों में भाग लेते हैं। यह महोत्सव केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि जौनपुर क्षेत्र की लोक संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का भी जीवंत प्रतीक है।
ग्रामीणों ने अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से घियाकोटी पहुंचकर भगवान शेषनाग देवता के दर्शन करने और इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक महोत्सव का हिस्सा बनने की अपील की है।

