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उत्तरकाशी बड़ी खबर राज्य उत्तराखंड

पूर्व अध्यक्ष जिला पंचायत नारायण सिंह चौहान ने रवांई -जौनपुर क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति घोषित करने की उठाई मांग… पढ़ें खबर।

नौगांव । रवाईं-जौनपुर क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की 74 साल पुरानी मांग एक बार फिर उठी है। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व अध्यक्ष जिला पंचायत नारायण सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर इस क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति घोषित करने को लेकर प्रस्ताव सर्वोच्च प्राथमिकता पर भारत सरकार को भेजने का अनुरोध किया है।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि रवाईं-जौनपुर की जनता 1952 से इस क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति घोषित करने की मांग करती आ रही है। 1965 में भारत सरकार द्वारा भेजी गई एक संसदीय समिति ने जौनसार बावर एवं रवाईं-जौनपुर क्षेत्र के सर्वेक्षण के बाद जौनसार बावर को अनुसूचित जनजाति घोषित करने की संस्तुति की थी। भारत सरकार ने 1957 में जौनसार बावर को मान्यता दी, लेकिन रवाईं-जौनपुर क्षेत्र की अनदेखी हुई।

पत्र में कहा गया कि रवाईं-जौनपुर क्षेत्र भी जौनसार बावर जैसा बहुपत्नी प्रथा वाला भू-भाग है और इनके सामाजिक-आर्थिक ढांचे में किसी भी प्रकार का अंतर नहीं है। 1972 में लाल बहादुर शास्त्री अकादमी मसूरी एवं सांसद परिपूर्णानन्द पैन्यूली ने भी संयुक्त भ्रमण के बाद इस क्षेत्र के सभी आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति में घोषित करने की संस्तुति भारत सरकार को दी थी, लेकिन उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

मालूम हो कि 1974 में उत्तरकाशी भ्रमण के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी ने एक आम सभा में रवाईं-जौनपुर को अनुसूचित जनजाति घोषित करने की घोषणा की थी। 1975 में बड़कोट सम्मेलन में भारत सरकार के गृह मंत्री के प्रतिनिधि और तत्कालीन उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी शीघ्र स्वीकृति का आश्वासन दिया था।

22 जनवरी 2003 को उत्तरप्रदेश सरकार ने और नवगठित उत्तराखण्ड सरकार ने भी इस आशय का प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेजा। 28 जनवरी 2003 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देहरादून की एक आम सभा में भी रवाईं-जौनपुर को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने की घोषणा की थी।

नारायण सिंह चौहान ने पत्र में लिखा कि लम्बे समय से चली आ रही इस मांग पर दया दृष्टि रखते हुए रवाईं-जौनपुर क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति में सम्मिलित करने की स्वीकृति हेतु प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जाए।

अगर यह मांग पूरी होती है तो रवाईं-जौनपुर क्षेत्र के लोगों को शिक्षा, आरक्षण और विकास योजनाओं में अनुसूचित जनजाति का लाभ मिलेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि जौनसार बावर के समान सांस्कृतिक पहचान के बावजूद अब तक इस क्षेत्र को उपेक्षित रखा गया है,और यदि मांग पूरी नहीं होती है तो रंवाई घाटी में बड़ा जन आंदोलन होगा।

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