बड़कोट।खरादी के पास यमुना नदी की दो धाराओं के बीच स्थित एक टापू पर गौ माता पिछले 20 दिनों से फंसी हुई है, जहाँ तक पहुँच पाना बेहद कठिन है। एसडीआरएफ (राज्य आपदा प्रतिवादन बल) की टीम ने दो दिन तक रेस्क्यू का प्रयास किया, परंतु अब तक गाय को सुरक्षित बाहर नहीं निकाला जा सका।
स्थिति अब बेहद गंभीर हो चुकी है। इतने दिनों से टापू पर फंसी गाय को अब चारा भी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिससे वह भूख से बेहाल हो चुकी है। यह एक जीवित प्राणी के जीवन की पुकार है, जिसे अब और नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
इस घटना पर स्थानीय सामाजिक संगठन “जय हो” ग्रुप बड़कोट ने तीव्र प्रतिक्रिया दी है और मुख्यमंत्री एवं जिलाधिकारी से अपील की है कि इस गौ माता को शीघ्र सुरक्षित रेस्क्यू किया जाए।
ग्रुप के सयोंजक सुनील थपलियाल, मनमोहन सिंह चौहान, मोहित अग्रवाल,विनोद बिष्ट,प्रदीप जैन, द्वारिका सेमवाल, नितिन,भगवती रतूड़ी,दिनेश रावत,दीनानाथ,महिताब धनाई ,संजय सजवाण, मदन पैन्यूली आदि का कहना है कि यह सिर्फ एक जानवर का मुद्दा नहीं, बल्कि मानवीय करुणा और उत्तराखंड की सांस्कृतिक परंपरा का विषय भी है जहाँ गाय को माता का दर्जा दिया गया है।उन्होंने कहा कि यमुना नदी के जलस्तर में हाल ही में हुई वृद्धि के कारण यह टापू पूरी तरह जल से घिर गया है, जिससे गाय बाहर निकलने में असमर्थ है। यदि तुरंत कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो एक निर्दोष प्राणी की जान जा सकती है। उन्होंने जल्द मदद की गुहार लगाई है।

