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आस्था का कुम्भ- पाली गाँव मे जहाँ इंसान ही नही सैकड़ो भेड़ बकरियां भी भगवान जाख समेश्वर के भव्य मंदिर की परिक्रमा करते है। यूट्यूब चैनल में देखें पूरी वीडियो……

आस्था का कुम्भ
पाली गाँव मे जहाँ इंसान ही नही सैकड़ो भेड़ बकरियां भी भगवान जाख समेश्वर के विशालकाय भव्य मंदिर की परिक्रमा करते है

सुनील थपलियाल
बड़कोट। आस्था और विश्वास का मीनी कुम्भ देखना हो तो पाली गांव जरूर पहुचें ,8 साल बाद आयोजित अठुड़ मेला क्षेत्र के ईष्ठ देव समेश्वर देवता के नाम समर्पित है, हजारो की संख्या मंे उमड़ी श्रद्वालुओं के बीच सैकड़ो भेड़ो का मन्दिर परिसर में परिक्रमा करना अपने आप में अनोखा दृश्य व अलग तरह का मेला आयोजित होना है। इस बार आयोजन में कृषिमंत्री गणेश जोशी ने भी शिरकत की।
मालुम हो कि उत्तरकाशी जनपद के बड़कोट तहसील का पाली गांव जहंा यमुनोत्री नेशनल हाईवे से लगभग ढाई किलोमीटर दुर्गम चढ़ाई चढ़कर या 4 किमी मोटर मार्ग से पहुंचना होता है। यहंा पर जाख समेश्वर देवता का विशालकाय मन्दिर है और 2016 के बाद 2023 में भेड़ बकरियों का यह पर्व यानी अठुड़ मेला आयोजित हुआ , इसमें दूर दराज से हजारों की संख्या में जनसैलाब श्रद्वालुओं का उमड़ा रहा , कहते है कि भगवान समेश्वर देवता पहले भेड़ पालक थे और उनको भेड़ बकरी से बड़ा प्रेम है और क्षेत्र की खुशहाली और क्षेत्र की सम्पन्नता के अलावा पशुपालन यानी भेड़ बकरी पालन हमेशा फले फूले इसकी कामना को लेकर अठुड़ मेला आयोजित होता है । पूर्वजों के अनुसार सावन के माह में भेड़ बकरी पालक अपने घर लौटते है और समेश्वर देवता से कुशलक्षेम लेने को लेकर यह पर्व हर तीसरे साल आयोजित होता था , परन्तु कुछ समय से अठुड़ मेला आयोजित नही हो पाया था , इस बार ग्रामीणों ने पाली गांव में काष्ठकला का अदभुत व अनोखा मन्दिर तैयार किया जिसकी प्राण प्रतिष्ठा हो गयी, इस बार ग्राम व ईष्ठ देव ने अठुड़ पर्व कराने के निर्देश दिये जिस पर ग्रामीणो ने सेकड़ो भेड़ो को मन्दिर परिसर की परिक्रमा के लिए बुलाया। इससे पूर्व पहले जाख समेश्वर देवता की पुजा अर्चना हुई , चारो ओर से श्रद्वालु जाख समेश्वर देवता के दर्शन के लिए उमड़े रहे , सभी अपनी अपनी मनोकामना को लेकर पाली गांव पहुचे हुए थे। उसके बाद गांव के युवक और युवतियों द्वारा रंवाई की वेश भूषा में लोक नृत्य देखने लायक था । कहते है कि अठुड़ का मतलब आठ बल्ली से लगाया जाता है और जब यह पर्व होता है तो उस समय पर्व शुरू होने से पहले गांव की सीमा के पास आठ बलियां दी जाती थी अब भले ही ग्रामीणों ने बली प्रथा समाप्त कर दी । यह सब होता था क्षेत्र व गांव की कुशलक्षेम के लिए । भेड़ बकरियों का मन्दिर परिसर में हजारो जनता की समाने परिक्रमा करना अपने आप में अलग तरह का मेला होना है । ग्रामीण हरदेव सिंह राणा कहते है कि अठुड़ मेला हमारा पौराणीक मेला है , सैकड़ो वर्षो से यह मेला आयाजित होता है और हर तीन साल बाद यह अवसर आता है कि गांव व क्षेत्र की सैकड़ो भेड़ बकरी यहंा मन्दिर में जाख समेश्वर देवता के दर्शन को आती है। जांख समेश्वर देवता के पुजारी कहते है कि इसका कोई लिखित इतिहास तो नही है परन्तु पूर्वज कहते है कि जाख समेश्वर एक भेड़ाल यानी भेड़ पालक था । सैकड़ो साल से इसे समेश्वर देवता के तौर पर क्षेत्र के लोग पुजा अर्चना करते है। इस बार का बिना मंत्री गणेश जोशी ने पाली गांव में कृषि केंद्र खोले जाने और इस मेले को राजकीय मेल घोषित किए जाने की घोषणा की ।इस मौके पर कृषि मंत्री गणेश जोशी, विधायक संजय डोभाल, पूर्व विधायक केदार सिंह रावत, अजवीन पंवार,सीएम जनसंपर्क अधिकारी मुलायम सिंह रावत,जेष्ठ प्रमुख किशन राणा, हरदेव सिंह , सहित ग्राम सभा के अलावा दूर दराज के हजारों लोग मेले के गवाह बने ।

टीम यमुनोत्री Express

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