यमुनोत्री express ब्यूरो
उत्तरकाशी
नौला फाउंडेशन के तत्वावधान में हरेला बायोडायवर्सिटी महोत्सव के अंतर्गत सरस्वती विद्या मंदिर जूनियर हाईस्कूल ज्ञानसू में स्थानीय जैव विविधता व जल स्रोतों के संरक्षण के लिए संकल्प लिया गया व रूद्राक्ष, अश्वगंधा, घृत कुमारी, मोरपंखी आदि पौधे रोपित किए।
हरेला बायोडायवर्सिटी महोत्सव के जनपदीय नोडल समन्वयक डॉ. शम्भू प्रसाद नौटियाल ने हरेला बायोडायवर्सिटी महोत्सव की रूपरेखा से परिचित कराते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य में हितधारक सामुदायिक सहभागिता से सूख चले स्परिंग, नौले, गाड-गधेरे व प्राकृतिक जल स्रोतों के स्प्रिंगशेड के पुनर्जीवन के लिए उनके आसपास की पारंपरिक जैव विविधता के संरक्षण के लिए नौला संगठन नमामि गंगे जल शक्ति मंत्रालय के साथ मिलकर संयुक्त प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही कहा कि ग्रामीण जीवन के लिए नौला कितना महत्वपूर्ण माना जाता था। इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि विवाह के उपरान्त जब नव वधु अपने ससुराल में आती है तो सर्वप्रथम उसे नौला या धारा पूजन के लिए भेजा जाता है। यानि नौला पूजन उत्तराखंड की सांस्कृतिक परम्परा का एक लौकिक अनुष्ठान है।

मुख्य अतिथि राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक नारायण सिंह राणा ने कहा कि प्राकृतिक जल स्रोत पर्वतीय लोगों के लिए वरदान है उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में प्राकृतिक जल स्रोत हजारों गांवों की जल जीवन रेखा है। इन्हें पन्यारा, नौला, धारा इत्यादि नामों से जाना जाता है। यह जल स्रोत प्राचीन समय से ही गांव में पीने एवं अन्य घरेलू आवश्यकताओं के लिए जलापूर्ति का मुख्य जरिया रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार राजीव खत्री ने कहा कि बदलते दौर, जीवनशैली में आए बदलाव और पाइपलाइन आधारित पेयजल आपूर्ति के चलते प्राकृतिक जल स्रोत, नौला व धारा जैसी धरोहरें पहाड़ समाज की अनदेखी और उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। अगर इन जल स्रोतों को सहेजा जाये तो ये आज भी उतने ही प्रभावी एवं उपयोगी साबित हो सकते हैं। योग प्रशिक्षक व विद्यालय के व्यवस्थापक ज्ञानचंद रमोला ने हरेला पर्व आधारित गीत से मंत्र मुग्ध किया वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक अजय ने पालीथीन उल्मूलन हेतु बेहतरीन जानकारी साझा की। इस अवसर पर गायत्री परिजन संजीव बहुगुणा व सेवानिवृत्त सूबेदार चतर सिंह पंवार ने भी विचार व्यक्त किए। हरेला पर्व पर आयोजित निबंध, भाषण व चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले व अन्य प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस अवसर पर विद्यालय के आचार्य व छात्र-छात्राएं मौजूद थे।

